उधमपुर: 1500 प्राकृतिक स्रोत मिटा रहे ग्रामीणों की प्यास, जलशक्ति विभाग के लिए बने खेवनहार
शहर व ग्रामीण इलाकों में लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी जलशक्ति विभाग की है। अभी तक विभाग इसमें पूरी तरह से कामयाबी हासिल नहीं कर पाया है। इसका बड़ा कारण बड़े प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उधमपुर जिले में पानी की किल्लत को दूर करने में छोटे प्राकृतिक जल स्रोत अहम भूमिका निभा रहे हैं। जलशक्ति विभाग की ओर से जिलभर में 1500 से अधिक बावलियों, झरनों व अन्य स्रोतों से शहर सहित ग्रामीण इलाकों में पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इससे जहां लागत कम है और लाइन बिछा कर सीधे उपभोक्ताओं पहुंचाया जा रहा है। इसे फिल्टर करने की जरूरत नहीं होती है।
पर्वतीय इलाकों में नदियां नहीं है, जिससे पानी को लिफ्ट कर ग्रामीणों तक पहुंचाया जा सके। लेकिन अब जलशक्ति छोटे जल स्रोतों के सहारे पानी को लिफ्ट करना शुरू कर दिया है। इसके लिए बावलियों और झरनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पानी को विभाग लिफ्ट कर तैयार किए गए टैंक तक पहुंचाता है और फिर आगे घरों तक आपूर्ति की जाती है। इन प्राकृतिक जल स्रोतों के देखभाल का काम भी विभाग ही कर रहा है। इसके जरिए जिले के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में भी पानी की सप्लाई पहुंचाने में मदद मिल रही है।
चैरी स्वैल में साकन बावली से हो रही आपूर्ति
रेलवे स्टेशन के नजदीक ही प्राचीन साकल बावली है। इसमें 24 घंटे पानी बहता रहता है। हर रोज हजारों लोग बावली पर पहुंच कर स्नान करने के साथ पीने के लिए ले जाते हैं। जलशक्ति विभाग ने इसके पानी को भी लिफ्ट कर घरों में सप्लाई देना शुरू कर दिया है। इससे सैकड़ों परिवारों को लाभ मिल रहा है।
ये भी पढ़ें- अमरनाथ यात्राः पवित्र गुफा से आईं दुर्लभ तस्वीरें, घर बैठे कीजिए बाबा बर्फानी के दर्शन
जिले के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में छोटे प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी की सप्लाई देने में काफी मदद मिल रही है। विभाग ने करीब 1500 प्राकृतिक जलस्रोतों का इस्तेमाल कर लिया है। इसमें विस्तार का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जल्द उन लोगों को पानी मिल सके, जिनको आज तक पानी की सुविधा नहीं मिल सकी है। - ताज चौधरी, एक्सईएन, जलशक्ति विभाग