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जम्मू-कश्मीर: भद्रवाह में लुप्त हो रहे हैं प्राकृतिक चश्मे, जीर्णोद्वार की मांग
Sat, 19 Jun 2021 10:27 AM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 19 Jun 2021 10:27 AM IST
सार
भद्रवाह संयुक्त सोसाइटी के चेयरमैन ने बताया कि प्रशासन की अनदेखी के कारण जल स्रोत विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द कदम उठाने की अपील की है।
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भद्रवाह
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
डोडा जिले का भद्रवाह इलाका प्राकृतिक सौंदर्य के प्रसिद्ध है। लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण धीरे-धीरे भद्रवाह के चश्मे(जल स्रोत) विलुप्त होते जा रहे हैं। भद्रवाह की संयुक्त सोसाइटी इन्हें बचाने के लिए आगे आई है। सदस्यों ने जिला प्रशासन से इस दिशा में कदम उठाने की मांग की है।
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सदस्यों ने बताया कि 2019 में डोडा के पूर्व डीसी सागर दत्तात्रेय डेफोडे ने भद्रवाह के एक दिवसीय दौरे के दौरान स्थानीय लोगों को विलुप्त हो रहे प्राकृतिक चश्मों की जीर्णोद्वार करने का आश्वासन दिया था। इससे यहां की 32 फीसदी आबादी की पानी की जरूरत पूरी होनी थी।
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भद्रवाह संयुक्त सोसाइटी के चेयरमैन अभिमन्यु कोतवाल ने बताया कि डीसी ने 45 विलुप्त हो रहे चश्मों की पहचान की थी, जिनमें 15 चश्में भद्रवाह कस्बे में और 30 ग्रामीण इलाकों में हैं। जमीनी स्तर पर अभी तक कुछ भी काम नहीं हुआ है।
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