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Youth Day 2021: पिता की नौकरी गई तो बेटियों ने संभाली ऑटो का स्टीयरिंग, चुनौतियों को इस तरह दी मात

Tue, 12 Jan 2021 10:50 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 12 Jan 2021 10:50 AM IST
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National Youth Day jammu kashmir two Daughters took over steering to overcome challenges
ऑटो

कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होने से निजी स्कूल बस चालक की नौकरी चली गई तो उसकी दो बेटियों ने ऑटो की स्टीयरिंग संभाल ली। जम्मू संभाग में उधमपुर शहर के शक्तिनगर वार्ड सात में रहने वाली दोनों बेटियां ऑटो चलाकर परिवार का खर्च चला रही हैं। जम्मू-कश्मीर में ये बेटियां पहली महिला ऑटो चालक बन गई हैं। एक कॉलेज तो दूसरी स्कूल की छात्रा है। सवारियां मिलने पर ऑटो चलाती हैं और खाली वक्त के दौरान ऑटो में पढ़ाई करती हैं। कॉलेज में स्नातक भाग दो की छात्रा बंजीत कौर के पास बाकायदा लाइसेंस है जबकि दसवीं की परीक्षा देने की तैयारी कर रही दविंदर कौर ने लाइसेंस के लिए आवेदन कर रखा है।

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दोनों बहनों ने बताया कि पिता निजी स्कूल की बस चलाते थे। इसी से वह अपनी चारों बेटियों का भरण पोषण कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होते ही पिता की नौकरी भी चली गई। पिता बीमारी से ग्रस्त भी हैं। ऐसे में घर पर मौजूदा ऑटो पर नजर पड़ी। बंजीत और दविंदर ने कहा कि हिम्मत कर पिता से ऑटो चलाने की अनुमति मांगी। दोनों ने पहले ऑटो चलाना सीखा। अब दो माह से ऑटो चलाकर घर का खर्च निकालने और पढ़ाई साथ-साथ कर रही हैं।
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एनसीसी कैडेट है बंजीत सेना में शामिल होना सपना
बंजीत कौर एनसीसी कैडेट भी है। उसने बताया कि दोनों बहनों का सपना सेना में शामिल होकर देश सेवा करना है। उससे पहले घर की जिम्मेदारी भी है। बंजीत ने कहा कि सेना में भी चालकों की जरूरत होती है। इसके लिए वह प्रयास कर रही हैं। उम्मीद है कि एक दिन कामयाब होकर मिसाल कायम करेंगी।

पिता बोले - बेटियों का आत्मनिर्भर होना जरूरी
गौरख सिंह ने बताया कि उन्होंने खुद ऑटो चालक होने के बावजूद बेटियों को ऑटो चलाने की अनुमति दी। उन्होंने बेटियों को समझाया कि लोगों की परवाह किए बिना अपना काम करें। किसी की बातों की तरफ ध्यान नहीं देना है। उनके दिमाग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से किए गए आह्वान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात रहती है। उन्होंने कहा कि बेटियों का आत्मनिर्भर बनना बेहद जरूरी है।

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