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आरक्षण पर संघ प्रमुख के बयान से जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान, नेशनल कांफ्रेंस के निशाने पर भागवत
Wed, 21 Aug 2019 11:59 AM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 21 Aug 2019 11:59 AM IST
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मोहन भागवत
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नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के वरिष्ठ नेता अजय सडोत्रा ने कहा कि आरएसएस प्रमुख आरक्षण विरोधी सोच बना रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो यह देश में एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के लिए नुकसानदायक होगा। इससे पिछड़े वर्ग के लोगों के हितों का हनन होगा। आरएसएस प्रमुख आरक्षण के खिलाफ बातें कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. बीआर आंबेडकर ने एससी, एसटी, ओबीसी समुदाय को संविधान में आरक्षण का अधिकार दिया था। प्रधानमंत्री सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा दे रहे हैं, जबकि दूसरी ओर पिछड़े वर्ग के लोगों के खिलाफ आरक्षण विरोधी मुहिम चलाई जा रही है।
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आपको बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर आरक्षण पर चर्चा करने की वकालत की है। उन्होंने रविवार को कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं और जो इसके खिलाफ हैं, उन्हें सौहार्दपूर्ण वातावरण में इस पर विमर्श करना चाहिए।
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संघ प्रमुख ने कहा कि उन्होंने आरक्षण पर पहले भी बात की थी, लेकिन तब इस पर काफी बवाल मचा था और पूरा विमर्श असली मुद्दे से भटक गया था। भागवत ने कहा कि जो आरक्षण के पक्ष में हैं, उन्हें इसका विरोध करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए। वहीं जो इसके खिलाफ हैं उन्हें भी वैसा ही करना चाहिए।
ज्ञान उत्सव के समापन सत्र में उन्होंने कहा कि आरक्षण पर बहस का परिणाम हर बार तीव्र क्रिया और प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। इस मसले पर समाज के विभिन्न वर्गों में सौहार्द बनाने की जरूरत है। गौरतलब है कि इससे पहले संघ प्रमुख ने आरक्षण नीति की समीक्षा करने की वकालत की थी, जिसका विभिन्न दलों और जातियों ने कड़ा विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि आरएसएस, भाजपा और पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार तीनों का अलग अस्तित्व है और किसी एक के काम के लिए दूसरे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मोदी सरकार पर संघ के प्रभाव पर उन्होंने फिर कहा कि क्योंकि भाजपा और सरकार में संघ के कार्यकर्ता हैं, वे आरएसएस की सुनते हैं, लेकिन उनका हमसे सहमत होना जरूरी नहीं है।