नगरोटा के आतंकियों ने हमले के कुछ देर पहले ही की थी घुसपैठ
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नगरोटा सैन्य मुख्यालय के करीब आर्टिलरी यूनिट पर हुए फिदायीन हमले के चमलियाल कनेक्शन की तलाश की जा रही है। कहा जा रहा है कि 6 से 8 आतंकियों के ग्रुप ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रामगढ़ सेक्टर में सोमवार की रात घुसपैठ की। आतंकियों का दल तवी नदी के रास्ते नगरोटा तक पहुंच गया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा राज्य सरकार चमलियाल कनेक्शन की तलाश में जुटी हुई है। सूत्रों का कहना है कि दोपहर बाद गृह मंत्रालय और राज्य सरकार ने अचानक हरकत में आते हुए बीएसएफ से इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
यही वजह है कि दोपहर डेढ़ बजे घटना की जानकारी देने के लिए बुलाई गई आईजी बीएसएफ की प्रेस कांफ्रेंस तय समय पर नहीं हो पाई। सैन्य प्रवक्ता मनीष मेहता का कहना है कि फिलहाल जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आतंकियों का रूट क्या था। अभी प्रारंभिक तौर पर कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी।
रात 11 बजे के आसपास हुई थी घुसपैठ
सूत्रों का कहना है कि घुसपैठ करने वाले आतंकी बड़ी तबाही की साजिश के साथ रात साढ़े 11 बजे घुसपैठ कर भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। सभी आतंकियों को नगरोटा में आर्टिलरी यूनिट पर हमले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। घुसपैठ के दौरान कुछ आतंकी ट्रैप कर लिए गए, जबकि अन्य रात में ही नगरोटा के लिए चल दिए।
इसके बाद उन्होंने सुबह साढ़े पांच बजे के आसपास हमला कर दिया। फिदायीन हमलावरों के पास भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद थे। उन्होंने अपने शरीर पर आईईडी बांध रखा था। हालांकि, बीएसएफ का कहना है कि घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई है। आतंकियों को ट्रैप कर उन्हें खत्म कर दिया गया है।
रामगढ़ सेक्टर में आईबी पर कई दरियाई नाले तथा सरकंडों का जंगल है, जो घुसपैठ की राह को आसान बनाता है। पहले भी इस सेक्टर से घुसपैठ की कई कोशिशें हो चुकी हैं। इससे पहले सांबा में सैन्य ठिकाने पर भी आतंकियों ने हमला किया था।
उड़ी के बाद सबसे बड़ा हमला
उड़ी हमले के बाद नगरोटा का हमला दूसरा सबसे बड़ा हमला है। उड़ी में ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। नगरोटा में दो अफसरों सहित सात जवान शहीद हो गए।
दस घंटे से अधिक समय तक चले आपरेशन में सभी तीन फिदायीनों को मार गिराया गया। यह फिदायीनों का दुस्साहस ही था कि उन्होंने कोर मुख्यालय के करीब हमले की साजिश रची।