Gramya 2022: जम्मू में कला शिल्प मेला का शुभारंभ, चिकनकारी, मधुबनी पेंटिंग, पश्मीना से सजे हैं स्टॉल
कला केंद्र जम्मू में अखिल भारतीय शिल्प-कला मेले के शुभारंभ हुआ। इसे 'ग्राम्य 2022' नाम दिया गया है। शिल्प मेला दो अक्टूबर तक जारी रहेगा।
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राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) जम्मू -कश्मीर की ओर से सोमवार को कला केंद्र जम्मू में अखिल भारतीय शिल्प-कला मेले के शुभारंभ हुआ। इसे 'ग्राम्य 2022' नाम दिया गया है। शिल्प मेला दो अक्टूबर तक जारी रहेगा। आम जनता के लिए ये सुबह 10:30 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहेगा। इसका उद्घाटन नाबार्ड क्षेत्रिय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. अजय कुमार सूद ने किया।
ग्राम्य मेले में कई विशेष उत्पाद शामिल हैं- जैसे झारखंड की टसर सिल्क साड़ियां, राजस्थान की जयपुरी रजाई और चर्मा जूती, उत्तर प्रदेश की चिकनकारी, बिहार की विश्व प्रसिद्ध मिथिला और मधुबनी पेंटिंग, पश्चिम बंगाल के जूट उत्पाद, तमिलनाडु से पालमायरा और केला फाइबर। जम्मू कश्मीर के स्थानीय उत्पाद बसोहली पश्मीना, कश्मीरी कालीन और जैविक हल्दी, शहद भी प्रदर्शित किए गए हैं।
आयोजकों का कहना है कि जम्मू के दुकानदार इस मेले में आने वाले कारीगरों और शिल्पकारों से सीधे संपर्क कर सकते हैं और टाई-अप व्यवस्था के माध्यम से जम्मू में अपने विशेष उत्पादों को खरीद और बेच सकते हैं। इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन पहली बार जम्मू में नाबार्ड की ओर से किया जा रहा है, जिसमें देश भर के कारीगर और शिल्पकार अपने हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक, डॉ. अजय कुमार सूद ने कहा कि यह प्रदर्शनी जम्मू कश्मीर और अन्य राज्यों के कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने के लिए एक मंच प्रदान करेगी। यह प्रदर्शनी स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, कृषि उत्पादक संगठन को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, ग्राहकों की प्राथमिकताओं को समझने, नए मार्केटिंग कौशल सीखने के साथ साथ ग्राहक आधार विकसित करने का उपयुक्त अवसर प्रदान करेगी।
मेले में 18 राज्यों से आए 65 स्टॉल
इस प्रदर्शनी में देश भर के 18 राज्यों से यानी पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे - जम्मू-कश्मीर सहित कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि से 65 सालों को कला केंद्र परिसर में प्रदर्शित किया गया है। जम्मू कश्मीर से बाहर के कारीगरों की ओर से 50 स्टॉलों का प्रबंधन किया गया है।