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Jammu News: वादों में बीत गए पांच साल, लोगों को नगर परिषद से मलाल
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- सांबा के वार्डों में कई प्रोजेक्ट अधूरे, टूटी सड़कें और गंदगी से भरी गलियां-नालियां खोल रहीं विकास की पोल
- 5 करोड़ से नप की इमारत, मुख्य बस अड्डे पर शापिंग कांप्लेक्स और मदेरा में डंपिंग स्टेशन की मिल पाई सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के 17 वार्डों वाली नगर परिषद का कार्यकाल पूरा हो चुका है। यह पांच साल का कार्यकाल विकास के लिहाज से कुछ खास नहीं रहा। कई प्रोजेक्ट अधूरे हैं। लोगों का आरोप है कि पांच साल वादों और आश्वासनों में ही बीत गए। इन पांच सालों में शहर की पहचान टूटी सड़कों और गंदगी से भरी गलियों-नालियों से हो रही है।
लोगों ने जिन मुद्दों को लेकर पार्षदों को चुना, इनमें आज भी कई समस्याएं मुंह ताके खड़ी हैं। इनके पूरा न होने का कारण कोरोना काल में फंड की कमी भी माना जा रहा है। वार्ड-8 के मुख्य बाजार के बन तालाब क्षेत्र की बड़ी मांग गंदगी के डंपिंग स्टेशन को हटाया जाना था, जो पूरी नहीं हो सकी। कचरे ने लोगों की नाक में दम कर रखा है।
इसी वार्ड के सिंहनी ढक्की मार्ग की मांग भी जस की तस है। मंडी कोटली वार्ड-4 में ट्यूबवेल लगाने की मांग भी पांच साल में पूरी नहीं हुई। कस्बे के लोगों को सीवरेज की सुविधा का भी कोई समाधान नहीं हो सका। तीन व चार दिन बाद पानी मिल रहा है, पांच साल में इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई जा सकी। इन पांच सालों में नगर परिषद में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। दो बार अध्यक्ष के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया व एक बार उपाध्यक्ष के लिए। इस दौरान भी विकास कार्य प्रभावित रहे। हालांकि, नगर परिषद कार्यालय में पांच करोड़ की लागत से बनाई इमारत, मुख्य बस अड्डे पर पांच करोड़ से बना शापिंग कांप्लेक्स, मदेरा में बनाया गया डंपिंग स्टेशन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 880 मकान दिए गए, जो हाउस में बार-बार याद करवाए जाएंगे। निर्दलीय पार्षद वार्ड-17 महेश्वर राज के अनुसार उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था चरमराई है। हर जगह गंदगी के अंबार लगे हैं।
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कुर्सी के लिए खींचतान : दो बार अध्यक्ष और एक बार
उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव
सांबा नगर परिषद के 17 वार्ड में भाजपा के पांच, कांग्रेस के दो, पैंथर्स के दो और आठ निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। उस समय भाजपा के पास पूरा संख्या बल नहीं था। कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर भाजपा के पवन कोहली को अध्यक्ष व कांग्रेस के पार्षद कुमेर सिंह को उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। तीन वर्ष तक सब कुछ ठीक चलता रहा। अक्तूबर, 2022 को निर्दलीय पार्षद रजनी संब्याल को भाजपा में शामिल किया गया और उपाध्यक्ष कुमेर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर रजनी को उपाध्यक्ष बनाया गया। 2022 को नौ पार्षदों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। पांच माह तक मामला चलता रहा। बाद में भाजपा आला कमान के हस्तक्षेप पर इसे सुलझाकर पवन कोहली की कुर्सी को बचाया गया। इसके बाद वर्ष 2023 को फिर से नौ पार्षद पवन कोहली के खिलाफ हो गए। चार माह तक मामला अटका रहा और कोर्ट में पहुंच गया। भाजपा नेताओं ने एक बार फिर से पवन कोहली की कुर्सी को बचा लिया।
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जो वादे किए, उन्हें पूरा किया गया। पेयजल किल्लत को दूर करेंगे। कस्बे में पार्किंग की सुविधा दी जाएगी, आराजी मोहल्ले के सुंब मार्ग को चौड़ा करने, सफाई कर्मचारियों की संख्या बढाना शामिल था जो नही पूरा कर सके। उन्हों ने कस्बे के तालाबों की दशा सुधारी है,सब से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना के 880 मकान दिए है उन के कार्यकाल के दौरान कोई घर कच्चा नही बचा है। 1400 शौचालय बनाए हैं,पब्लिक शौचालय बनाए हैं
पवन कोहली, निवर्तमान अध्यक्ष, नगर परिषद, सांबा
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वार्ड-8 की अधिकतर समस्याओं का समाधान करवाया है। दो मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं निकल सका। पहली सिहंनी ढक्की है, जो पुरानी मांग थी। एक करोड़ के फंड उपलब्ध करवाए गए थे। किसी कारण काम पूरा नहीं हो सका। कस्बे के बन तालाब क्षेत्र में गंदगी के डंपिंग स्टेशन को उठाने के लिए अधिक फंड की जरूरत थी, जिस कारण समाधान नहीं हो सका।
रजनी संब्याल, निवर्तमान उपाध्यक्ष
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जब भाजपा के पास बहुमत नहीं तो तो कांग्रेस के समर्थन से अध्यक्ष बनाया। जब भाजपा के पास पार्षदों की संख्या पूरी हुई तो हमारे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। हमने अपने कार्यकाल के दौरान काफी विकास करवाया था।
कुमेर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष (कांग्रेस), नगर परिषद
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- 5 करोड़ से नप की इमारत, मुख्य बस अड्डे पर शापिंग कांप्लेक्स और मदेरा में डंपिंग स्टेशन की मिल पाई सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। कस्बे के 17 वार्डों वाली नगर परिषद का कार्यकाल पूरा हो चुका है। यह पांच साल का कार्यकाल विकास के लिहाज से कुछ खास नहीं रहा। कई प्रोजेक्ट अधूरे हैं। लोगों का आरोप है कि पांच साल वादों और आश्वासनों में ही बीत गए। इन पांच सालों में शहर की पहचान टूटी सड़कों और गंदगी से भरी गलियों-नालियों से हो रही है।
लोगों ने जिन मुद्दों को लेकर पार्षदों को चुना, इनमें आज भी कई समस्याएं मुंह ताके खड़ी हैं। इनके पूरा न होने का कारण कोरोना काल में फंड की कमी भी माना जा रहा है। वार्ड-8 के मुख्य बाजार के बन तालाब क्षेत्र की बड़ी मांग गंदगी के डंपिंग स्टेशन को हटाया जाना था, जो पूरी नहीं हो सकी। कचरे ने लोगों की नाक में दम कर रखा है।
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इसी वार्ड के सिंहनी ढक्की मार्ग की मांग भी जस की तस है। मंडी कोटली वार्ड-4 में ट्यूबवेल लगाने की मांग भी पांच साल में पूरी नहीं हुई। कस्बे के लोगों को सीवरेज की सुविधा का भी कोई समाधान नहीं हो सका। तीन व चार दिन बाद पानी मिल रहा है, पांच साल में इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई जा सकी। इन पांच सालों में नगर परिषद में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। दो बार अध्यक्ष के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया व एक बार उपाध्यक्ष के लिए। इस दौरान भी विकास कार्य प्रभावित रहे। हालांकि, नगर परिषद कार्यालय में पांच करोड़ की लागत से बनाई इमारत, मुख्य बस अड्डे पर पांच करोड़ से बना शापिंग कांप्लेक्स, मदेरा में बनाया गया डंपिंग स्टेशन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 880 मकान दिए गए, जो हाउस में बार-बार याद करवाए जाएंगे। निर्दलीय पार्षद वार्ड-17 महेश्वर राज के अनुसार उनके वार्ड में सफाई व्यवस्था चरमराई है। हर जगह गंदगी के अंबार लगे हैं।
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कुर्सी के लिए खींचतान : दो बार अध्यक्ष और एक बार
उपाध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव
सांबा नगर परिषद के 17 वार्ड में भाजपा के पांच, कांग्रेस के दो, पैंथर्स के दो और आठ निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। उस समय भाजपा के पास पूरा संख्या बल नहीं था। कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर भाजपा के पवन कोहली को अध्यक्ष व कांग्रेस के पार्षद कुमेर सिंह को उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। तीन वर्ष तक सब कुछ ठीक चलता रहा। अक्तूबर, 2022 को निर्दलीय पार्षद रजनी संब्याल को भाजपा में शामिल किया गया और उपाध्यक्ष कुमेर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर रजनी को उपाध्यक्ष बनाया गया। 2022 को नौ पार्षदों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। पांच माह तक मामला चलता रहा। बाद में भाजपा आला कमान के हस्तक्षेप पर इसे सुलझाकर पवन कोहली की कुर्सी को बचाया गया। इसके बाद वर्ष 2023 को फिर से नौ पार्षद पवन कोहली के खिलाफ हो गए। चार माह तक मामला अटका रहा और कोर्ट में पहुंच गया। भाजपा नेताओं ने एक बार फिर से पवन कोहली की कुर्सी को बचा लिया।
जो वादे किए, उन्हें पूरा किया गया। पेयजल किल्लत को दूर करेंगे। कस्बे में पार्किंग की सुविधा दी जाएगी, आराजी मोहल्ले के सुंब मार्ग को चौड़ा करने, सफाई कर्मचारियों की संख्या बढाना शामिल था जो नही पूरा कर सके। उन्हों ने कस्बे के तालाबों की दशा सुधारी है,सब से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना के 880 मकान दिए है उन के कार्यकाल के दौरान कोई घर कच्चा नही बचा है। 1400 शौचालय बनाए हैं,पब्लिक शौचालय बनाए हैं
पवन कोहली, निवर्तमान अध्यक्ष, नगर परिषद, सांबा
वार्ड-8 की अधिकतर समस्याओं का समाधान करवाया है। दो मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं निकल सका। पहली सिहंनी ढक्की है, जो पुरानी मांग थी। एक करोड़ के फंड उपलब्ध करवाए गए थे। किसी कारण काम पूरा नहीं हो सका। कस्बे के बन तालाब क्षेत्र में गंदगी के डंपिंग स्टेशन को उठाने के लिए अधिक फंड की जरूरत थी, जिस कारण समाधान नहीं हो सका।
रजनी संब्याल, निवर्तमान उपाध्यक्ष
जब भाजपा के पास बहुमत नहीं तो तो कांग्रेस के समर्थन से अध्यक्ष बनाया। जब भाजपा के पास पार्षदों की संख्या पूरी हुई तो हमारे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। हमने अपने कार्यकाल के दौरान काफी विकास करवाया था।
कुमेर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष (कांग्रेस), नगर परिषद