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JMC: चार साल नौ माह में जनरल हाउस की 20 बैठकें, 447 प्रस्तावों को हरी झंडी, धरातल उतरे महज 42

Tue, 20 Jun 2023 02:38 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Tue, 20 Jun 2023 02:38 PM IST
सार

पार्षदों ने ऐसे प्रस्ताव रखे हैं, जो निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। शहर में चौक-चौराहों के नाम बदलने, पाइप बिछाने, रास्तों का निर्माण के अलावा नाले और नालियों से जुड़े प्रस्तावों पर ही काम हो पाया। हाउस में पास प्रस्ताव लागू नहीं होने पर खूब गहमागहमी अगले सदन में होती है।

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jammu municiapl corporation: 20 meetings of General House in four years and nine months
Jammu Municipal Corporation - फोटो : संजय कुमार

विस्तार

चार साल नौ माह में जनरल हाउस की 20 बैठकें हो चुकी हैं। 447 प्रस्तावों को हाउस से हरी झंडी मिल चुकी है। मगर धरातल पर 42 ही लागू हो पाए। शेष 405 प्रस्ताव अब तक सचिवालय से मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि पार्षदों ने ऐसे प्रस्ताव रखे हैं, जो निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। शहर में चौक-चौराहों के नाम बदलने, पाइप बिछाने, रास्तों का निर्माण के अलावा नाले और नालियों से जुड़े प्रस्तावों पर ही काम हो पाया। हाउस में पास प्रस्ताव लागू नहीं होने पर खूब गहमागहमी अगले सदन में होती है। हर बार बैठक में लगभग दो लाख रुपये खर्च आता है। यानी 20 बैठकों में 40 लाख रुपये वहन हो चुके हैं। अब 21वीं बैठक शनिवार को है। इसमें 24 प्रस्तावों को मंथन के लिए नगर निगम में जमा करवाया है।
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वहीं, हाउस में सर्वसम्मति से पास हुए प्रस्ताव को जल्द लागू करने का दावा किया जाता है, पर समय बीतने के साथ प्रस्ताव बस कागज तक सीमित रह जाता है। अगस्त 2022 के सदन में मंजूर प्रस्तावों की स्थिति जानने के लिए पार्षदों ने जानकारी मांगी थी। उस समय डिप्टी मेयर पूर्णिमा शर्मा ने कहा था कि पास हुए प्रस्ताव सचिवालय भेजे जाते हैं। इसके बाद पता नहीं चलता कि क्या बना। आयुक्त से भी सवाल किया था, साथ ही हाउस में स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। कुछ पार्षदों ने यहां तक कह डाला था कि प्रस्ताव पास ही क्यों किए जाते हैं, जब लागू ही नहीं करवाने।
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पार्षदों ने दिए हैं कुछ इस तरह के प्रस्ताव

1. प्रतिनिधियों को क्या बोला जाए, कारपाेरेटर या कौंसलर। प्रस्ताव पास कर सचिवालय भेजा गया कि कारपोरेटर बोला जाए।
2. महाराजा हरि सिंह जयंती पर छुट्टी के लिए 2018 में प्रस्ताव पास कर भेजा गया।
3. वार्डों में पेयजल किल्लत के समाधान के लिए पांच लाख के बजाय 20 लाख रुपये देने का प्रस्ताव।
4. 2019 के बाद बदले चौक के नाम में परिवर्तन का प्रस्ताव, जो नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
5. अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की बात। 2022 में पूर्व मेयर ने जवाब दिया था कि पहले से ही सरकार के ध्यान में मुद्दा है। इस पर नगर निगम कुछ नहीं कर सकता।
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6. वार्ड-34 में डिस्पेंसरी खोलने का प्रस्ताव।
7. वाटर सप्लाई डिविजन एक से आने वाला राजस्व नगर निगम को देने का प्रस्ताव। इसके अलावा पार्षदों को सुरक्षा, अलग से फंड की व्यवस्था, नालों के लिए अलग से पैसा जारी करने समेत अन्य प्रस्ताव मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।

प्रस्तावों को मंजूरी के लिए सचिवालय भेजा जाता है। अभी तक एक भी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। जो प्रस्ताव निगम के दायरे में हैं, उन पर बहस होनी चाहिए। -द्वारका चौधरी, नेता विपक्ष।

नगर निगम का कार्यकाल तीन माह बाद पूरा होने जा रहा है। पहले हुए सदन में रखे प्रस्ताव अभी भी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इस कारण शहर का विकास नहीं हो रहा। -अमित गुप्ता, पार्षद, वार्ड-19।

हर बार मंजूर हुए प्रस्तावों के बारे में पूछा जाता है, पर कोई जवाब नहीं मिलता। जो प्रस्ताव सचिवालय भेजे गए हैं, उन्हें लागू करवाना नगर निगम की जिम्मेदारी है। -प्रीतम सिंह, पार्षद, वार्ड-55।

कार्यकाल में जो प्रस्ताव रखे, वे सचिवालय में भेजे गए। जानकारी नहीं है कि लागू हुए या नहीं। - चंद्र मोहन गुप्ता, पूर्व मेयर।

प्रस्तावों को मंजूरी के लिए सचिवालय भेजा जाता है। यह नहीं बताया जा सकता है-कौन से पास हुए। प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव लागू करने या फिर सचिवालय भेजने पर हाउस फैसला लेता है। -परविंद्र कौर, सचिव, नगर निगम


नगर निगम के हाउस में पारित प्रस्ताव को जांच करने के बाद भी आगे मंजूरी के लिए भेजा जाता है। कार्यक्षेत्र को लेकर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अगर प्रस्ताव नगर निगम के अधीन नहीं है तो उसे बाहर कर दिया जाता है। -राजेंद्र शर्मा, मेयर
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