मुफ्ती ने भारी मतदान का श्रेय सेना को दिया
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मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद अपने बयान से पलट गए हैं। कश्मीर में शांतिपूर्ण भारी मतदान के लिए उन्होंने पहले अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान को श्रेय दिया था। अब उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग, सुरक्षा बलों और कश्मीर के लोगों को श्रेय दिया है। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का उत्तर देते हुए मुफ्ती ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव से लोकतंत्र को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि अफस्पा हटाने से पहले अपने लोगों को जिम्मेदार भी बनाना होगा। अमन जरूरी है, ताकि अफस्पा की जरूरत नहीं रहे। इसके लिए प्रयास जारी है। मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की जमकर सराहना की। मुफ्ती ने कहा कि मोदी ने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया है।
वह देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं और उन्हें भारी जनादेश मिला है। मुफ्ती भाजपा-पीडीपी गठबंधन पर उठ रहे सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी महान राजनेता हैं। उनके समय में पाकिस्तान और हुर्रियत से बातचीत शुरू हुई।
अनुच्छेद 370 का बनाए रखना होगा
मुफ्ती ने कहा, कश्मीर में विश्वास का माहौल पैदा हुआ। उस दौरान एलओसी भी शांत रही और मुजफ्फराबाद के लिए बस सेवा शुरू हुई। अनेकता में एकता की खूबसूरती से ही भारत महान बन सकता है। जम्मू कश्मीर देश का एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य है। मोदी भी कश्मीर को समझते हैं।
बाढ़ के बाद वह कई दफा कश्मीर आए। मोदी ने सेना की मुठभेड़ में निर्दोष लोगों के मारे जाने के बाद आर्मी को जांच का हुक्म दिया और दोषी पर कार्रवाई करवाई। मुफ्ती ने कहा कि अनुच्छेद 370 को बनाए रखना होगा। उन्होंने इसे गठबंधन एजेंडे में शामिल करवाया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सवालों का उत्तर देते हुए मुफ्ती ने कहा कि जम्मू कश्मीर विधानसभा को देश में खास दर्जा है।
इसे बनाए रखना है। अनुच्छेद 370 के बाद कई बदलाव हुए। सदर-ए- रियासत की जगह गवर्नर और वजीर-ए-आजम की जगह मुख्यमंत्री हो गया। अब जो विशेष दर्जा है, उसे कायम रखने का वादा है। केंद्र का कोई कानून अभी सीधे यहां लागू नहीं होता।