‘लड़कियों में अपेक्षाओं को पार करने की है क्षमता’
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मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने सोमवार को समाज से प्रगतिशील बनने और लड़कियों के प्रति अपनी धारणा बदलने का आग्रह करते हुए कहा कि वे राष्ट्र विकसित नहीं हो सकते, जबतक वह लिंग के आधार पर बच्चों के बीच भेदभाव करना बंद न करें।
उन्होंने कहा कि लड़कियों को भी लड़कों के समान ही आर्थिक सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार चाहिए, ताकि वह राज्य के विकास और खुशहाली में बराबर की भागीदार बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि उनमें भी हमारी उम्मीदों को पूरा करने का जज्बा है।
इसलिए लड़कियों को भी खेल के मैदान उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री सोमवार को श्रीनगर के एसकेआईसीसी में लाडली बेटी योजना को औपचारिक तौर पर शुरू करने के बाद कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने इस दौरान गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों और आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए आसरा नामक बीमा योजना की शुरुआत भी की। कार्यक्रम के दौरान पीडीपी अध्यक्ष और सांसद महबूबा मुफ्ती, बागवानी मंत्री एआर वीरी, आरएंडबी मंत्री अल्ताफ अहमद बुखारी, समाज कल्याण मंत्री बाली भगत, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रोफेसर अमिताभ मट्टू के अलावा अन्य संबंधित अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
पंजीकरण प्रमाण पत्र बांटे
बच्चों के लालन-पालन को एक मुश्किल काम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लाडली बेटी योजना गरीब परिवारों में पैदा होने वाली बच्चियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी। यह लड़कियों ही सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण कदम हैं।
यह योजना उन हजारों अभिभावकों के लिए राहत लेकर आई है, जिनके लिए दो वक्त की रोटी कमाना भी मुश्किल है। इससे पहले, मुख्यमंत्री लाडली बेटी योजना के लाभार्थियों के बीच पासबुक और पंजीकरण प्रमाण पत्र वितरित किए।
उन्होंने आसरा योजना के लिए भी संबधित लोगों में पंजीकरण प्रमाणपत्र बांटे। महबूबा मुफ्ती ने भी योजना शुरू होने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन है।
उन्होंने कहा कि बेशक लोग सांकेतिक तौर पर लिंग समानता की बात करते हैं लेकिन लड़कियों के प्रति दुनिया की सोच आज भी पुरानी ही है।
उन्होंने इस अवसर पर जोर दिया कि लाडली बेटी और आसरा योजना के दायरे में ज्यादा से ज्यादा परिवारों को शामिल करने के लिए संबधित परिवारों की अधिकतम आय का दायरा 75 हजार से बढ़ाकर एक लाख किया जाए।