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मसर्रत पर केन्द्र के दबाव के आगे 'टूटी' मुफ्ती सरकार

Thu, 23 Apr 2015 11:58 PM IST
Updated Thu, 23 Apr 2015 11:58 PM IST
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mufti govt under central pressure booked masarat again

अलगाववादी और जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसर्रत आलम को दोबारा सलाखों के पीछे भेजने में केंद्र सरकार का जबर्दस्त दबाव रहा। केंद्र सरकार ने यह साफ जता दिया था कि मसर्रत को अब खुलेआम घूमने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

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इस वजह से राष्ट्रद्रोह के मामले में उसकी जमानत पर फैसला आने से पहले ही पीएसए लगाकर उसे दो साल तक के लिए जेल भेज दिया गया। दरअसल, पाकिस्तानी झंडा लहराने और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने से लेकर उसकी गिरफ्तारी और सलाखों के पीछे भेजने तक केंद्र लगातार रियासती सरकार के संपर्क में रहा।
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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदरपोरा में गिलानी की रैली के दौरान पाकिस्तानी झंडा लहराने और भारत विरोधी नारेबाजी के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद से फोन पर बात कर कठोर कार्रवाई की मंशा जता दी थी।

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25 अप्रैल को आना था कोर्ट का फैसला

mufti govt under central pressure booked masarat again

इस मसले पर हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों तथा विपक्षी दलों के हमले से दबाव में आई केंद्र सरकार ने साफ संदेश दिया कि मसर्रत की हर हालत में गिरफ्तारी होनी चाहिए। केंद्र के कड़े रुख के बाद उसके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कर घटना के दो दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इस बीच उसने बडगाम कोर्ट में जमानत की याचिका दाखिल कर दी।

जमानत पर 25 अप्रैल को फैसला आना था, पर वीरवार को उस पर पीएसए तामिल कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि कें द्र सरकार मसर्रत पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने तथा गिरफ्तारी के बाद पुलिस रिमांड से संतुष्ट नहीं थी।

वह उसे दोबारा जेल भेजने के पक्ष में थी, ताकि अलगाववादियों को कड़ा संदेश दिया जा सके कि देश की एकता-अखंडता से समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही विपक्षियों का मुंह भी बंद करना चाहती थी। हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि कानून ने अपना काम किया है।

भाजपा ने पारित किया था यह प्रस्ताव

mufti govt under central pressure booked masarat again

मां वैष्णो देवी के दरबार में गत सप्ताह हुई भाजपा राज्य कार्यकारिणी की बैठक में भी गठबंधन में रहने के बावजूद राष्ट्रवाद से किसी प्रकार का समझौता न करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने स्पष्ट किया था कि भाजपा सत्ता की खातिर अपने सिद्धांतों से नहीं डिगेगी। राज्य सरकार मसर्रत के मामले में कानून के अनुरूप कार्रवाई करेगी।

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