मुफ्ती ने दोहराया, अलग से नहीं बसाए जाएंगे कश्मीरी पंडित
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मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने शुक्रवार को विधान परिषद में भी दोहराया कि कश्मीरी पंडितों को घाटी में अलग से नहीं बसाया जाएगा। कश्मीर की मिली-जुली संस्कृति के तहत मुस्लिमों के साथ मिलकर ही कश्मीरी पंडितों की घाटी में पूरे सम्मान के साथ वापसी करवाई जाएगी।
विधान परिषद में शुक्रवार को बजट सत्र के आखिरी दिन धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर में मौजूदा समय में 7247 कश्मीरी पंडित मिली-जुली संस्कृति का हिस्सा बनकर रह रहे हैं। इनमें अनंतनाग में 638, गांदरबल में 157, पुलवामा में 395 और बडगाम में 870 कश्मीरी पंडित हैं।
सरकार चाहती है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी पूरे सम्मान के साथ हो और सियासी अस्थिरता का माहौल भी दूर हो। मुफ्ती ने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत एक-एक बात पूरी की जाएगी।
कश्मीरी पंड़ितों ने किया विरोध प्रदर्शन
जब भी विस्थापित कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में बसाने की बात की जाती है तो यासीन मलिक, उमर फारूक, सईद अली शाह गिलानी व अन्य अलगाववादी इसका विरोध करने लगते हैं। शुक्रवार को जगती टेनोमेंट कमेटी सोन कश्मीर फ्रंट के प्रधान शादी लाल पंडिता ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह वही अलगाववादी हैं जिनकी सुरक्षा पर सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
राज्य सरकार भी इन्हीं के सुर में सुर मिलाकर बात कर रही है। उन्होंने कहा कि शनिवार को राज्य सरकार और अलगाववादियों के खिलाफ जगती में प्रदर्शन किया जाएगा। पंडिता ने कहा कि सुरक्षा मिलने पर कश्मीरी पंडित सैटेलाइट टाउन में बसने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि 25 वर्ष से कश्मीरी पंडित विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। अलगाववादियों ने कश्मीर में उनकी जमीन पर कब्जा कर रखा है। अब जब केंद्र सरकार कश्मीरियों को वापस भेजने की बात कर रही है तो अलगाववादियों को तकलीफ होने लगी है।
'मुफ्ती दिल्ली में कुछ कहते हैं जेके में कुछ'
मुफ्ती दिल्ली में कश्मीरियों को बसाने की बात करते हैं तो राज्य में अलगाववादियों के इशारे पर इसका विरोध करते हैं। सैटेलाइट कालोनी बनाने के नाम पर सिर्फ राजनीति की जा रही है। कश्मीरी पंडित सैटेलाइट कालोनी में बसने को पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उनको सुरक्षा का पूरा भरोसा देना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करेंगे। कमेटी की मांग है कि प्रत्येक कश्मीरी पंडित परिवार को स्थायी रूप से बसने के लिए 50 लाख रुपये की राशि दी जाए। प्रत्येक महीने मिलने वाली राहत राशि में बढ़ोतरी की जाए। युवाओं को रोजगार पैकेज का लाभ दिया जाए।
इस मौके पर रतन लाल भट, राजेंद्र धर, सुनील रैना, रमेश भट, विजय पंडिता, एसएल कर, हरी कृष्ण मौजूद थे।
अलगाववादियों के बहकावे में न आएं: रिजजू
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजजू ने कहा है कि केंद्र सरकार गंभीरता से अफस्पा जैसे मुद्दे पर सोच विचार कर रही है। जिस प्रकार से लोगों ने घाटी में चुनावों में भाग लिया, उससे कश्मीर में शांति फिर से लौटेगी। कश्मीर की अवाम अमन चाहती है। उनके अनुसार अफस्पा विशेष परिस्थितियों के दौरान एक विशेष प्रावधान है।
अगर स्थिति ठीक हो, तो ऐसे प्रावधान हटाए जा सकते हैं। जब सुरक्षा के लिहाज से स्थिति असामान्य हो, तो तब परामर्श करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय इसके खिलाफ है। केवल गृह मंत्रालय की हरी झंडी से इसे नहीं हटाया जा सकता। हम सभी को एक मंच पर बैठ कर इस पर विचार विमर्श करना होगा।
अफस्पा जैसे प्रावधानों का न तो दुरुपयोग होना चाहिए न हीं उसका अपमान। घाटी में स्वाधीनता सेनानियों की समिति की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों के कश्मीर में पुनर्वास के लिए केंद्र द्वारा प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि अलगाववादी ऐसे तत्व हैं, जो लोगों की भावनाओं को बिना समझे विवाद खड़ा करना चाहते हैं। मेरी लोगों से अपील है कि इनके बहकावे में नहीं आएं।