J&K: विधानसभा में पाक जिंदाबाद के नारे लगाने वाले विधायक की फिर सीनाजोरी
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विधायक के जवाब से असंतुष्ट अध्यक्ष ने वीरवार को इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है।विधानसभा अध्यक्ष कवींद्र गुप्ता की ओर से विधानसभा सचिवालय के अतिरिक्त सचिव ने 28 फरवरी को विधायक को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। सात दिन के भीतर उन्हें जवाब देने को कहा गया था।
लोन ने सात मार्च को विधानसभा सचिवालय को अपना जवाब भेजा। विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री तथा डिप्टी स्पीकर रहे लोन के खिलाफ पूरे जम्मू संभाग में कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन होते रहे। विभिन्न संगठनों की ओर से उनकी गिरफ्तारी तथा सदस्यता रद्द करने की मांग की जाती रही।
इस मामले पर भाजपा की ओर से लगातार विधानसभा अध्यक्ष पर दबाव बनाया जाता रहा। रामनगर से विधायक आरएस पठानिया ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा नियम व कार्यवाही संबंधी कानून की धारा-247 के तहत 12 फरवरी को विधानसभा अध्यक्ष को याचिका दी थी।
इसमें नेकां विधायक मोहम्मद अकबर लोन की सदस्यता रद्द करने और मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी। उस दिन विधानसभा में यह मामला उठाया गया था, जिसका पूरी पार्टी ने समर्थन किया था। तब अध्यक्ष ने भविष्य में इस प्रकार की किसी घटना का दोहराव न होने की बात कहते हुए हंगामा शांत करा दिया था।
हालांकि, रामनगर विधायक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक सत शर्मा का कहना था कि अब भी याचिका अध्यक्ष के पास लंबित है। विधानसभा का केवल सत्रावसान हुआ है। अध्यक्ष अब भी इस पर फैसला ले सकते हैं। इस मामले में कार्रवाई होने तक पार्टी दबाव बनाती रहेगी।
जानें आखिर क्या है पूरा मामला
विधानसभा में 10 फरवरी को मोहम्मद अकबर लोन ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए थे। दरअसल सुंजवां कैंप में फिदायीन हमले को लेकर भाजपा ने पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी शुरू की, तो लोन ने भी आवेश में आकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिए।
बाद में विधानसभा परिसर में लोन ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने भाजपा की प्रतिक्रिया में यह नारे लगाए थे। लोन के नारा लगाते ही पार्टी ने इस मसले से किनारा कस लिया था। पार्टी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि लोन को यह याद रखना चाहिए कि पार्टी हमेशा से दो राष्ट्र के सिद्धांत का विरोध करती रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता शक्ति उप्पल ने विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन मुख्य दंडाधिकारी (सीजेएम) अश्विनी शर्मा ने इसे खारिज कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि विधायक विशेष व्यक्ति होता है। इसमें विधानसभा ही कोई कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।