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मुखर्जी के सपनों का हुआ जम्मू-कश्मीर, एक विधान एक निशान का सपना हुआ साकार, मिशन कश्मीर हुआ पूरा
Mon, 05 Aug 2019 04:52 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 05 Aug 2019 04:52 PM IST
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- फोटो : फाइल
जम्मू कश्मीर में अनुछेद 370 और 35ए को खत्म कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में अनुछेद 370 और 35ए को हटाने की मांग की थी जिसके बाद ये ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। केंद्र सरकार के इस फैसले पर लगातार प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
बीजेपी नेता राम माधव ने इस मुद्दे पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, सरकार ने सात दशक पुरानी मांग को पूरा कर दिया है। वो सपना जो जम्मू-कश्मीर को एक करने के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था, जिसके लिए हजारों लोगों ने शहादत दी, आखिरकार वो आंखों के सामने सच हो रहा है।
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मुखर्जी ने वर्ष 1953 में दो विधान, दो निशान के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था जो पूरा नहीं हो पाया। अब जाकर वह सपना पूरा हो सका है। जम्मू-कश्मीर के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया परंतु यहां सत्ता में आने वाली सरकारों ने उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए था।
लखनपुर में परमिट प्रणाली के विरोध में जब मुखर्जी ने विशाल मार्च निकाला था तो उन्हें जम्मू में प्रवेश करने पर यहां की तत्कालीन सरकार ने रोका था। यही नहीं उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें कश्मीर में एक जगह पर कैदी बनाकर रखा गया। अगर सरकार चाहती तो उन्हें लखनपुर से वापस भी लौटाया जा सकता था। लेकिन ऐसा करने के बजाय उन पर जन सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर 40 दिन तक कारागार में रखा गया।
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बीजेपी नेता राम माधव ने इस मुद्दे पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, सरकार ने सात दशक पुरानी मांग को पूरा कर दिया है। वो सपना जो जम्मू-कश्मीर को एक करने के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था, जिसके लिए हजारों लोगों ने शहादत दी, आखिरकार वो आंखों के सामने सच हो रहा है।
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मुखर्जी ने वर्ष 1953 में दो विधान, दो निशान के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था जो पूरा नहीं हो पाया। अब जाकर वह सपना पूरा हो सका है। जम्मू-कश्मीर के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया परंतु यहां सत्ता में आने वाली सरकारों ने उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए था।
लखनपुर में परमिट प्रणाली के विरोध में जब मुखर्जी ने विशाल मार्च निकाला था तो उन्हें जम्मू में प्रवेश करने पर यहां की तत्कालीन सरकार ने रोका था। यही नहीं उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें कश्मीर में एक जगह पर कैदी बनाकर रखा गया। अगर सरकार चाहती तो उन्हें लखनपुर से वापस भी लौटाया जा सकता था। लेकिन ऐसा करने के बजाय उन पर जन सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर 40 दिन तक कारागार में रखा गया।
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कांग्रेस सरकार पर भी यह भी आरोप लगे कि उनकी मौत के बाद भी समय पर उनके परिवार को सूचना नहीं दी गई। उनकी मौत सुबह कश्मीर में हुई जबकि उस समय की राज्य सरकार ने दोपहर 1:00 बजे इसकी सूचना रेडियो के माध्यम से दी। हद तो यह है कि उनका शव बंगाल पहुंचाने के लिए 7000 किराया भी नहीं दिया गया। उनका पार्थिव शरीर जब बंगाल पहुंचा तो वहां के लोगों ने यह नारे लगाना शुरू कर दिए कि जहर दिया है, जहर दिया है, शेख ने जहर दिया है। ऐसी पूर्व सरकारों को हम कैसे माफ कर दें? यह एक अहम सवाल है।
बता दें, घाटी में 35ए को खत्म करते ही जम्मू-कश्मीर को अब दिल्ली की तरह केंद्र शासित प्रदेश तो राज्य का विभाजन कर लद़्दाख को चंडीगढ़ की तरह केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। साथ ही घाटी को धारा 370 के जरिए जो विशेषाधिकार प्राप्त थे, वो खत्म हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा दी गई मंजूरी को पेश किया।
वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार के इस फैसले से जहां विपक्ष के एक हिस्से को झटके लगने शुरू हो गए हैं तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष का एक हिस्सा इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत कर रहा है। जी हां, मायावती की पार्टी बीएसपी (बहुजन समाज पार्टी) ने मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है।
बता दें, घाटी में 35ए को खत्म करते ही जम्मू-कश्मीर को अब दिल्ली की तरह केंद्र शासित प्रदेश तो राज्य का विभाजन कर लद़्दाख को चंडीगढ़ की तरह केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। साथ ही घाटी को धारा 370 के जरिए जो विशेषाधिकार प्राप्त थे, वो खत्म हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा दी गई मंजूरी को पेश किया।
वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार के इस फैसले से जहां विपक्ष के एक हिस्से को झटके लगने शुरू हो गए हैं तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष का एक हिस्सा इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत कर रहा है। जी हां, मायावती की पार्टी बीएसपी (बहुजन समाज पार्टी) ने मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है।