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जम्मू-कश्मीर : चुनिंदा नहीं, सर्वमान्य नीति से दिया जाना चाहिए अल्पसंख्यक का दर्जा
Wed, 30 Mar 2022 03:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 30 Mar 2022 03:58 AM IST
सार
केंद्र के कुछ राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की बात पर पीडीपी व नेकां की प्रतिक्रिया।
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- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
जिन राज्यों में हिंदुओं की संख्या कम है, वहां उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा देने की केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट में कही गई बात पर पीडीपी और नेकां ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कहा कि उन्हें इससे कोई एतराज नहीं है, लेकिन वह चाहते हैं कि यह दर्जा हर उस समुदाय के लोगों को दिया जाना चाहिए, जिस राज्य में उनकी संख्या कम हो।
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पीडीपी के वरिष्ठ नेता रौफ भट ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में ‘पिक एंड चूज’ की नीति नहीं होनी चाहिए। यह दर्जा हिंदुओं के साथ मुसलमानों को भी दिया जाना चाहिए, जिन राज्यों में वे अल्पसंख्यक हैं।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस की वरिष्ठ नेता शमीमा फिरदौस का कहना है कि जिन राज्यों में हिंदू कम हैं और उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाता है तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी जो केंद्र सरकार चाहती है, देश में वही होता है, चाहे उसका कितना भी विरोध क्यों न हो रहा हो।
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मालूम हो कि केंद्र सरकार ने एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वे राज्य हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकते हैं, जहां वे बहुमत में नहीं हैं। याचिका में कहा गया था कि हिंदू 10 राज्यों में अल्पसंख्यक हैं और वे उन योजनाओं का लाभ उठाने में सक्षम नहीं हैं जो उनके लिए बनाई गई हैं।