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J&K: एक ऐसा जवान, जो पहले था आतंकी फिर सेना में हुआ भर्ती और दे दी देश के लिए जान

Tue, 27 Nov 2018 01:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 27 Nov 2018 01:52 PM IST
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militant turned soldier lance naik nazeer martyred in shopian encounter in jammu kashmir
शहीद नजीर अहमद - फोटो : फाइल
जम्मू-कश्मीर में जहां एक तरह आतंकवाद पैर पसारे हुए है वहीं एक पूर्व आतंकी ऐसा भी था जिसने अपनी जान गंवा कर छह आतंकियों को मौत की नींद सुला दिया। सोमवार को शोपियां जिले के करपान इलाके के हिपुरा बाटागुंड गांव में मुठभेड़ में 6 आतंकवादी मारे गए इस दौरान सेना का एक जवान भी शहीद हो गया। शहीद जवान घाटी के कुलगाम का ही रहने वाला था। काफी साल पहले वह आतंकवाद की राह पर था जहां से उसने आत्मसमर्पण पर दिया था। इसके बाद वह टेरीटोरियल आर्मी में भार्ती हो गया था। आज हर किसी को उस पर गर्व है। सेना के अधिकारियों ने कहा है कि शहीद नजीर अहमद वानी का बलिदान बेकार नहीं जाएगा।
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शहीद नजीर अहमद वानी कुलगाम के चक अशमुजी गांव के रहने वाले थे। देश के लिए बलिदान देने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को पूरे गांव ने अश्रुपूर्ण विदाई देकर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया। सेना और आतंकियों के बीच हुए मुठभेड़ में वह शहीद हो गए थे। सैनिक का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेट कर कुलगाम में उनके पैतृक गांव चक अशमुजी लाया गया और उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। 
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पार्थिव शरीर के साथ आए सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि वानी शुरूआत में एक आतंकवाद के रास्ते पर थे, लेकिन बाद में हिंसा की निरर्थकता महसूस करने के बाद वे सेना में शामिल हो गए थे। सामान्यतौर पर लोगों यही मानना है कि आतंक का अपना कोई ईमान नहीं होता, लेकिन शहीद लांस नायक नाजिर अहमद वानी उनमें से नहीं थे। उन्होंने आतंक की राह छोड़ खुद को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
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तीन बार सेना ने किया था सम्मानित                                                                                                                                                   

लांसनायक वानी एक बेहतरीन सिपाही थे और वर्ष 2007 में उनकी वीरता के लिए उन्हें सेना मेडल दिया गया था। जिसके बाद उन्हें दो बार अगस्त 2017 और 2018 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। वानी के घर में पत्नी और दो बच्चे हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में टेरिटोरियल आर्मी से की थी। उन्हें कल सुपुर्द ए खाक करते समय 21 तोपों की सलामी दी गई। इस मौके पर सैकड़ों लोग मौजूद थे। उनका गांव आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात है। लेकिन जैसे की वानी की मौत की खबर लगी गांव में मातम छा गया। 

 
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