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कश्मीर घाटी में नहीं मिल रहे आतंकी बनने वाले युवा तो जैश अन्य राज्यों में माड्यूल बनाने में जुटा
Sat, 23 Feb 2019 12:35 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 23 Feb 2019 12:35 AM IST
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- फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती पर सख्ती और युवाओं के घटते रुझान के चलते अब आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अन्य राज्यों में अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू की है। उत्तर प्रदेश के देवबंद में पकड़े गए आतंकी इसी माड्यूल का हिस्सा बताए जाते हैं। संगठन की ओर से अन्य राज्यों के युवाओं को झांसे में लाकर जेहादी मानसिकता भरने की साजिश के तहत ही कई युवाओं को कश्मीर से बाहर पढ़ने के लिए भेजे जाने की बात सामने आई है।
खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि घाटी के टेंपरामेंट में धीरे-धीरे काफी बदलाव आया है। अब युवा पत्थरबाजी तथा आतंकी गतिविधियों में कम रुचि लेने लगे हैं। इसका एक बड़ा कारण पिछले एक साल में आतंकी संगठनों को हुई भारी नुकसान की वजह से उत्पन्न डर भी है। साथ ही उन्हें अब लगने लगा है कि इस रास्ते से उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला है।
इसमें अभिभावकों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि अब सेना या अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती में हजारों की संख्या में युवा उमड़ते हैं। आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर में महिलाएं भी पुलिस की भर्ती के लिए पिछले दिनों पहुंचीं थी। बारामुला में सेना की 161 टीए (जैकलाई) की भर्ती रैली में वीरवार को करीब 3000 युवा शामिल हुए।
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आईजी कश्मीर एसपी पाणि का कहना है कि युवाओं के आतंक से जुड़ने में कमी आई है। टाप कमांडरों के मारे जाने से स्थानीय युवाओं के बंदूक थामने की घटनाओं में पिछले तीन महीने में कमी आई है। बच्चों की घर वापसी में उनके परिवार वालों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि घाटी के टेंपरामेंट में धीरे-धीरे काफी बदलाव आया है। अब युवा पत्थरबाजी तथा आतंकी गतिविधियों में कम रुचि लेने लगे हैं। इसका एक बड़ा कारण पिछले एक साल में आतंकी संगठनों को हुई भारी नुकसान की वजह से उत्पन्न डर भी है। साथ ही उन्हें अब लगने लगा है कि इस रास्ते से उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला है।
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इसमें अभिभावकों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि अब सेना या अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती में हजारों की संख्या में युवा उमड़ते हैं। आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर में महिलाएं भी पुलिस की भर्ती के लिए पिछले दिनों पहुंचीं थी। बारामुला में सेना की 161 टीए (जैकलाई) की भर्ती रैली में वीरवार को करीब 3000 युवा शामिल हुए।
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आईजी कश्मीर एसपी पाणि का कहना है कि युवाओं के आतंक से जुड़ने में कमी आई है। टाप कमांडरों के मारे जाने से स्थानीय युवाओं के बंदूक थामने की घटनाओं में पिछले तीन महीने में कमी आई है। बच्चों की घर वापसी में उनके परिवार वालों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
घाटी में पिछले साल से ऑपरेशन ऑल आउट के तहत कई टॉप कमांडर ढेर किए गए। स्थानीय तथा पाकिस्तानी आतंकी भी मारे गए। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से घबराकर आतंकी तंजीमों ने अपने आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना तलाशने की हिदायत दी है। साथ ही आबादी वाले इलाकों से दूर रहने को कहा है ताकि उनकी लोकेशन का सुरक्षाबलों को पता न लग सके।
सेना की सख्ती के चलते अब युवाओं की भर्ती में कमी आई है। इन तंजीमों को नए लड़के नहीं मिल पा रहे हैं। इस वजह से उसने अन्य राज्यों की ओर रुख किया है ताकि वहां के युवाओं को इस रास्ते पर धकेला जा सके।
घाटी में 14 महीने में जैश के 70 आतंकी ढेर
घाटी में पिछले साल जैश के 58 आतंकी मारे गए थे। इस साल भी अब तक मारे गए 31 आतंकियों में से 12 जैश के थे।
सेना की सख्ती के चलते अब युवाओं की भर्ती में कमी आई है। इन तंजीमों को नए लड़के नहीं मिल पा रहे हैं। इस वजह से उसने अन्य राज्यों की ओर रुख किया है ताकि वहां के युवाओं को इस रास्ते पर धकेला जा सके।
घाटी में 14 महीने में जैश के 70 आतंकी ढेर
घाटी में पिछले साल जैश के 58 आतंकी मारे गए थे। इस साल भी अब तक मारे गए 31 आतंकियों में से 12 जैश के थे।