महबूबा ने उठाए सवाल: कश्मीर में हालात सामान्य तो मौलवियों को गिरफ्तार क्यों किया गया, दबाई जा रही है आवाज
महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट में लिखा, भाजपा की सांप्रदायिक मानसिकता को दर्शाने वाले ऐसे कार्यों की घोर निंदा करते हैं। सीपीआईएम के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा कि यह एक चाल है। इससे पहले भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
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कश्मीर में धर्म गुरुओं की पीएसए के तहत गिरफ्तारी की सियासी दलों ने निंदा की है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि अगर हालात सामान्य है तो फिर ऐसे कानूनों के तहत उलेमाओं को क्यों गिरफ्तार किया गया। वहीं सीपीआईएम के नेता मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी का कहना है कि यह सरकार की चाल है, जहां से कोई बुलंद आवाज उठती है वहां उसे दबाने की कोशिश की जाती है।
यह सरकार की चाल
महबूबा मुफ़्ती ने अपने ट्विटर हैंडल पर किये गए ट्वीट में लिखा, भाजपा की सांप्रदायिक मानसिकता को दर्शाने वाले ऐसे कार्यों की घोर निंदा करते हैं। इस मुद्दे पर सीपीआईएम के सीनियर नेता मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने कहा कि यह एक चाल है। अभी इन तीन उलेमाओं को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले भी वो गिरफ्तार हुए और रिहा भी हुए।
फिर से गिरफ्तार करने का कारण क्या
अब फिर से गिरफ्तार करने का कारण क्या है। तारिगामी ने कहा कि सरकार ऐसे कदम उठाकर लोगों की भावनाओं को उकसाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि पीएसए लगाना, एनआईए की ओर से गिरफ्तारियां आदि जैसे कदम पहले भी उठाए गए और आज भी उठाए जा रहे हैं।
सोच विचार कर इनकी रिहाई अंजाम देनी चाहिए
उन्होंने कहा कि इनके नतीजे अच्छे नहीं निकले हैं। तारिगामी ने कहा कि अगर सरकार यहां हालातों को ठीक करना चाहती है तो ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को सोच विचार कर इनकी रिहाई अंजाम देनी चाहिए। इतना ही नहीं जो प्रदेश और प्रदेश के बाहर जेलों में बंद हैं, उनके बारे में भी सोचने की जरूरत है।
सेब उत्पादकों को पेश आने वाली परेशानियों पर एलजी हस्तक्षेप करें: महबूबा
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने सेब उत्पादकों को पेश आने वाली परेशानियों को लेकर प्रदेश के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप करने की अपील की है। महबूबा ने अपने ट्विटर हैंडल पर किए गए ट्वीट में लिखा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सेब से लदे ट्रक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई दिनों से फंसे हुए हैं।
सेब व्यवसाय हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। वह पहले से ही एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। अब परिवहन में रुकावट और कम दरों के कारण भारी नुकसान हो रहा है। प्रार्थना है कि उप राज्यपाल हस्तक्षेप करें।
वहीं एक अन्य ट्वीट में महबूबा ने लिखा, सेब की गिरती कीमतों और परिवहन बाधाओं के कारण यह उद्योग लगभग विनाश के कगार पर पहुंच गया है। बागवानी कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार इस उद्योग को अपनी लापरवाही से नष्ट कर रही है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।