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गैर विस्थापित कश्मीरी पंडितों को भी कल्याण प्रक्रिया में शामिल करें: महबूबा मुफ्ती

Mon, 13 Feb 2017 10:55 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 13 Feb 2017 10:55 PM IST
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mehbooba mufti speaks about kashmiri pandits
महबूबा मुफ्ती - फोटो : File Photo

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकार के कल्याण के प्रयास में गैर विस्थापित कश्मीरी पंडितों को भी शामिल किए जाने के लिए कहा। बहुलवादी संस्कृति का सम्मान करते हुए मुसलमानों, सिख जैसे सभी विस्थापित समुदायों के सदस्यों को भी ट्रांजिट आवास में जगह दी जानी चाहिए।

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उन्होंने घाटी में ट्रांजिट आवास केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के सभी बुनियादी सुविधाओं के प्रावधान का भी निर्देश दिया।पुनर्वास, राहत एवं आपदा प्रबंधन विभागों की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित समुदाय के सदस्य जिन्होंने घाटी में अपने घरों को नहीं छोड़ा, उनमें से कई बहुत ही गरीब स्थिति में रह रहे हैं। इन पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
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उन्होंने पंडित परिवारों, विशेष रूप से जगती में राशन की आपूर्ति के बारे में जानकारी ली और वितरण प्रक्रिया को सरल व परेशानी मुक्त बनाने पर जोर दिया। इनकी समस्याओं को कम करने के लिए उन्होंने विस्थापित शिविरों और पंडित बस्तियों में कुछ उचित मूल्य की दुकानें खोलने का भी सुझाव दिया। 

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पीओके रिफ्यूजियों को राहत वितरण की प्रक्रिया सरल

mehbooba mufti speaks about kashmiri pandits
महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल फोटो

बैठक में यह भी बताया गया कि पाक अधिकृत कश्मीर से विस्थापित के बीच राहत वितरण के लिए दस्तावेज की प्रक्रिया को सरलीकृत किया गया है। पहले निर्धारित 11 दस्तावेजों की बजाय अब केवल तीन दस्तावेज की जरूरत है।

यह भी बताया गया कि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने और उनके मामलों को निपटाने के लिए विभिन्न तहसीलों और स्थानों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। राज्य सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर से विस्थापित व्यक्तियों के संबंध में राहत पैकेज का वितरण शुरू कर दिया है और अब तक 96 ऐसे परिवारों को प्रति परिवार 5.50 लाख रुपये का नकद राहत भुगतान किया गया है।

पिछले कुछ महीनों के दौरान कई प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अनुरोध किया था कि लाभार्थियों की पहचान के लिए दस्तावेज की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और उनकी सुविधा के लिए तहसीलों व उनके स्थानों पर शिविर आयोजित किए जाएं।

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