CM महबूबा बोलीं- कश्मीरियों जो भी चाहते हो भारत से मिलेगा, कहीं और से नहीं
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान से दो टूक कहा हैं कि जम्मू कश्मीर हिंदोस्तान से जुड़ने की अपनी तकदीर 1947 में ही लिख चुका है। अब इसे कोई नहीं बदल सकता है। मुख्यधारा से जुड़े लोग हों या फिर अलगाववाद से, वह जान लें कि जो कुछ मिला है या मिलेगा वह अपने मुल्क हिंदोस्तान से ही मिलना है।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए अपने 48 मिनट के भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कश्मीर का जो मसला हैं वह पूरी तरह से सियासी हैं लेकिन कुछ तत्व राज्य के मुस्लिम बहुल होने के चलते इसे धर्म से जोड़ना चाहते हैं जिसके खतरनाक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बातचीत से ही समस्या का हल संभव है। केंद्र सरकार ने इसे समझते हुए वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा की नियुक्ति की है। उन्हें कैबिनेट सचिव के बराबर रैंक दिया गया है।
इससे ही समझा जा सकता हैं कि केंद्र सरकार बातचीत के प्रति कितनी गंभीर है। वार्ताकार कई बार राज्य का दौरा कर चुके हैं लेकिन कोई उनसे बातचीत नहीं करें तो उनका क्या किया जा सकता है।
2016 में भी बड़े -बड़े नेता नई दिल्ली से कश्मीर आए थे और अलगाववादियों के घरों के दरवाजे तक खटखटाए थे लेकिन उन्होंने दरवाजे नहीं खोले। नई दिल्ली से आए नेता कमजोर नहीं है या डरते नहीं हैं।
बस वह बातचीत से मसले का हल निकालने की राह निकालना चाहते थे। चाहे युद्ध विराम उल्लंघन में कोई नागरिक मरे या एनकाउंटर में या फिदायीन हमले में मरते तो हमारे लोग ही है।
जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा ने विधानसभा भवन में देश में चल रही धर्मिक मुद्दों पर हो रही राजनीति पर जमकर हमला बोला है। महबूबा ने कहा कि किसी भी राजनैतिक मुद्दे को धर्मिक मुद्दों की तर्ज पर हाईजैक किया जा रहा है।
महबूबा ने PDP-BJP के गठबंधन पर उठ रहे सवालों पर कहा कि मुल्क में क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा है, लेकिन हमारे रियासत में बेहतर तालमेल है और मुझे अच्छा लगता है जब सुबह मंदिर की घंटी, उसके बाद अजान और दिन में गुरबानी को सुनती हूं।
दो साल के दौरान हालात बेहतर नहीं रहे। धीरे -धीरे स्थिति सामान्य हो रही है लेकिन सब ठीक हैं यह नहीं कहा जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की 120 करोड़ जनता का जनमत प्राप्त है और उनके पास क्षमता भी है। यह बात हम ही नहीं विपक्ष में बैठे डा. फारूक अब्दुल्ला भी अब कह रहे हैं।
वाजपेयी जी ने भी इंसानियत को मद्देनजर रखते हुए पाकिस्तान तो क्या अलगाववादियों से भी बातचीत शुरू की थी। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए थे। सीमा पर भी शांति रही थी। मोदी सरकार ने वार्ताकार की नियुक्ति कर बड़ा कदम उठाया है। सबके साथ बातचीत की पेशकश भी की है।