सीएम महबूबा और फारूक अब्दुल्ला समेत कई राजनेताओं ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को 1931 के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। महबूबा ने हजरत नक्शबंद साहिब में मजार-ए-शोहादा पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट करते हुए कहा कि रियासत में लोकतंत्र को स्थापित करने में शहादतों ने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर कई मंत्री, मुख्य सचिव बीबी व्यास, पुलिस महानिदेशक डा. एस पी वेद, सियासी, सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने हजरत बाहुद्दीन नक्शबंद की दरगाह पर जाकर रियासत में शांति, खुशहाली और विकास की दुआएं कीं। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में महबूबा ने कहा कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि रियासत में लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष प्रणाली को मजबूती प्रदान करके ही दी जा सकती है।
उन्हें आशा प्रकट की कि रियासत में असमंजस और हिंसा का दूर जल्द दूर होगा और सुलह, शांति और आपसी विश्वास से हालात दुरुस्त होंगे। उन्होंने कहा संतोषजनक बात हैं कि रियातस के लोगों ने वैचारिक मतभेद को छोड़ श्री अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले की निंदा की।
फारूक अब्दुल्ला ने भी दी श्रद्धांजलि
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने भी बुधवार को 1931 के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। फारूक अब्दुल्ला ने इस अवसर पर कहा कि गठबंधन सरकार में सहयोगी दल भाजपा का शहीदों को श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम में हिस्सा न लेना यह दर्शाता में सरकार में शामिल भाजपा और पीडीपी केवल सत्ता के लिए एक साथ है। 1931 का नरसंहार डोगरा राज में हुआ। ऐसे में भाजपा कैसे हिस्सा ले।
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 13 जुलाई रियासत के इतिहास का अहम भाग है। उन्होंने कहा गठबंधन सरकार में सहयोगी दल भाजपा श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हिस्सा न लेकर शहीदों का ही नहीं रियासत के संविधान का भी अपमान कर रही है। ब्यूरो