J&K:असंतुष्ट मंत्रियों को अहम मंत्रालय देने से महबूबा का इनकार
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने असंतुष्ट मंत्रियों को अहम विभाग देने से इनकार कर दिया है। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों सैयद बशारत बुखारी और इमरान रजा अंसारी से महबूबा ने पहले दूतों के माध्यम से और बाद में स्वयं बातचीत की है। उन्होंने मंत्रियों से स्वर्गीय मुफ्ती मोहम्मद सईद के सपने को पूरा करने के लिए पार्टी में एकजुटता बनाए रखने को कहा है।
महबूबा ने असंतुष्टों को साफ संदेश दे दिया है कि वह दबाव की सियासत के आगे नहीं झुकेंगी। उधर दोनों मंत्री भी फिलहाल इस्तीफे पर अड़े हैं। पीडीपी के सूत्रों के मुताबिक महबूबा पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक बुला सकती हैं।
वर्तमान में असंतुष्ट मंत्रियों को समझा-बुझाकर नए मंत्रालयों को कामकाज संभालने पर सहमत करने की कोशिश परदे के पीछे भी चल रही है। महबूबा ने श्रीनगर और अनंतनाग संसदीय क्षेत्रों में होने वाले चुनावों से पहले निहित स्वार्थों और आपसी मनमुटाव छोड़कर पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया है।
महबूबा ने फिलहाल अपने फैसले पर कायम रहने का मूड बनाया
श्रीनगर की सीट तारिक अहमद कर्रा द्वारा पीडीपी छोड़ने के बाद संसदीय सीट से इस्तीफे के कारण खाली हुई है। कर्रा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। श्रीनगर सीट पर नेशनल कांफ्रेंस की मजबूत पकड़ रही है। यही कारण है कि अमीराकदल के विधायक अल्ताफ बुखारी को मंत्री बनाकर शिक्षा मंत्री बनाया गया।
सूत्रों के मुताबिक महबूबा ने असंतुष्ट मंत्रियों से कहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कद्दावर समझे जाने वाले मंत्री नईम अख्तर और अब्दुल रहमान वीरी के भी विभाग बदले गए हैं। नईम को शिक्षा की जगह पीडब्ल्यूडी और वीरी को पीडब्ल्यूडी की जगह राजस्व मंत्रालय दिया गया। वरिष्ठ मंत्रियों ने इसे स्वीकार किया। इसी तरह अन्य को भी बदलाव स्वीकार करना चाहिए। महबूबा ने मुफ्ती मंत्रिमंडल के अल्ताफ बुखारी, जावेद मुस्तफा मीर, मो. अशरफ मीर और अब्दुल मजीद पाडरू को ड्राप किया था।
इनमें से सिर्फ अल्ताफ बुखारी को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह मिली। अगर असंतुष्ट मंत्रियों के दबाव के आगे महबूबा झुकती हैं तो मंत्री पद खो चुके अन्य तीन विधायक भी सियासी दबाव बढ़ा सकते हैं। इसलिए महबूबा ने फिलहाल अपने फैसले पर कायम रहने का मूड बनाया है।
यह है नाराजगी का कारण
बशारत से राजस्व मंत्रालय वापस लेकर हार्टिकल्चर जैसा कम महत्वपूर्ण विभाग दिया गया। इस कारण वह खफा हैं। उधर इमरान मंत्रिमंडल विस्तार में अहम मंत्रालय चाहते थे। विस्तार से पहले सूचना प्रौद्योगिकी और युवा-खेल की जगह अहम मंत्रालय का वादा सीएम ने किया था।
इमरान का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने वादा पूरा नहीं किया। इमरान शिया समुदाय से हैं और शिया मुस्लिम चार सीटों पर प्रभावी माने जाते हैं। इस्तीफा देने वाले दोनों मंत्री बारामुला जिले के संग्रामा और पट्टन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यूं चली मनाने की कसरत
दरअसल मुफ्ती के निधन के बाद पीडीपी के कुछ दिग्गजों की महत्त्वाकांक्षाएं सामने आ रही हैं। कर्रा की बगावत के बाद महबूबा ने पार्टी पर उसका कोई असर नहीं पड़ने दिया, लेकिन पार्टी में असंतुष्टों की गतिविधियों पर वह सचेत हैं।
इस्तीफा देने वाले मंत्रियों बशारत और इमरान से शनिवार को पार्टी उपाध्यक्ष और महबूबा के रिश्तेदार सरताज मदनी, पार्टी महासचिव रफी अहमद मीर और ग्रामीण विकास मंत्री अब्दुल हक से मुलाकात कर इस्तीफा वापस लेने की अपील की थी।
असंतुष्ट मंत्रियों ने इस पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिए। बाद में महबूबा ने बशारत से पहले फोन पर बात की। बाद में बशारत श्रीनगर में सीएम आवास में जाकर महबूबा से मिले।