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'मदीना में हमला इस्लाम पर सबसे अपमानजनक हमला'
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Tue, 05 Jul 2016 08:59 PM IST
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : अमर उजाला
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मदीना मस्जिद के पास हमले को मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस्लाम पर सबसे अपमानजनक हमला बताया है। कहा कि इस्लाम की सबसे पवित्र जगह सदियों से इंसानियत के लिए शांति और स्थिरता की प्रेरणा रही है।
ऐसे पवित्र स्थान पर रमजान महीने में हमला करने वालों ने अंतिम रेखा को भी लांघ दिया है। उन्होंने कहा पूरे विश्व के मुसलमानों को एक स्वर में ऐसी घटनाओं के विरोध में खड़ा होना होगा।
श्रीनगर शहर के सफाकदल, गंगबाग और नाटीपोरा में कम्युनिटी सेंटरों का उदघाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए महबूबा ने आतंकी हमले को लेकर जमकर लताड़ लगाई। कहा कि रमजान के महीने में जिस तरह से मुस्लिम मुल्कों में सिलसिलेवार हमले हो रहे हैं वह दिल को दहलाने वाले हैं।
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इराक, तुर्की और काबुल से लेकर बांगलादेश में खून बहाया जा रहा है। ऐसे हमले न सिर्फ मुसलमानों के लिए बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। आखिर हमला करने वाले लोग हथियार और अन्य संसाधन कहां से जुटा रहे हैं।
जम्मू कश्मीर के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन सबसे पहले हिंसा करने वालों को अलग-थलग करने की जरूरत है। दो दशक में कश्मीर ने व्यापक स्तर पर नुकसान झेला है। अब ऐसा और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
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ऐसे पवित्र स्थान पर रमजान महीने में हमला करने वालों ने अंतिम रेखा को भी लांघ दिया है। उन्होंने कहा पूरे विश्व के मुसलमानों को एक स्वर में ऐसी घटनाओं के विरोध में खड़ा होना होगा।
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श्रीनगर शहर के सफाकदल, गंगबाग और नाटीपोरा में कम्युनिटी सेंटरों का उदघाटन करने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए महबूबा ने आतंकी हमले को लेकर जमकर लताड़ लगाई। कहा कि रमजान के महीने में जिस तरह से मुस्लिम मुल्कों में सिलसिलेवार हमले हो रहे हैं वह दिल को दहलाने वाले हैं।
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इराक, तुर्की और काबुल से लेकर बांगलादेश में खून बहाया जा रहा है। ऐसे हमले न सिर्फ मुसलमानों के लिए बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। आखिर हमला करने वाले लोग हथियार और अन्य संसाधन कहां से जुटा रहे हैं।
जम्मू कश्मीर के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन सबसे पहले हिंसा करने वालों को अलग-थलग करने की जरूरत है। दो दशक में कश्मीर ने व्यापक स्तर पर नुकसान झेला है। अब ऐसा और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।