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सियासत: अनुच्छेद 370 पर महबूबा मुफ्ती और गुलाम नबी आजाद आमने-सामने, जानें क्या कहा

Wed, 14 Sep 2022 03:38 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 14 Sep 2022 03:38 PM IST
सार

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का कहना है कि अफसोस है कि गुलाम नबी आजाद जैसे बड़े नेता ने अनुच्छेद 370 पर अपना गलत बयान देकर जम्मू कश्मीर के लोगों की उम्मीदों को तोड़ा है।

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Mehbooba Mufti and Ghulam Nabi Azad contradict on Article 370 in jammu kashmir
मेहबूबा मुफ्ती और गुलान नबी आजाद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अनुच्छेद 370 को लेकर प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री आमने-सामने हैं। एक तरफ गुलाम नबी आजाद ने राजनीतिक दलों से कहा कि वह घाटी में अनुच्छेद 370 के नाम पर जनता बेवकूफ न बनाएं। तो दूसरी तरफ महबूबा मुफ्ती का कहना है कि उन्हें अफसोस है कि गुलाम नबी आजाद जैसे बड़े नेता ने अनुच्छेद 370 पर अपना गलत बयान देकर जम्मू कश्मीर के लोगों की उम्मीदों को तोड़ा है।

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जम्मू कश्मीर की उम्मीदों को तोड़ रहे गुलाम नबी आजाद- मुफ्ती

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 5 अगस्त 2019 में भारतीय संविधान को तोड़कर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया। तब बदकिस्मती से पूरा देश यह देखता है। आज मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। भारतीय संविधान की भाजपा धज्जियां उड़ा रही है। भाजपा आज नागालैंड में संसद या संविधान को पीछे छोड़कर झंडा देने को तैयार है, जबकि वहां एक ट्रक में 18 फौजियों को उड़ा दिया गया था। अनुच्छेद 370 को वापस लाने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ जैसी आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही है। अफसोस है कि गुलाम नबी आजाद जैसे बड़े नेता ने अनुच्छेद 370 पर अपना गलत बयान देकर जम्मू कश्मीर के लोगों की उम्मीदों को तोड़ा है। हमारे कार्यकाल में लक्षित हत्याएं नहीं हुई।
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हमने 16 माह कश्मीरी पंडित कर्मियों को बिठाकर वेतन दिया था। जम्मू कश्मीर में चुनाव के बारे में मोदी और अमित शाह ही बता सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया असांविधानिक है क्योंकि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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'सेल्फ रूल से ही संभव जम्मू कश्मीर मसले का हल'

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के संविधान में जम्मू कश्मीर मसले का हल सेल्फ रूल से ही संभव है। इसकी शुरुआत तब हो गई थी जब अटल बिहारी बाजपेयी ने मुज्जफराबाद और उड़ी मार्ग के साथ रावलाकोट व पुंछ मार्ग को खोला था। सेल्फ रूल को कोई रोक नहीं सकता। इसी से हिंदुस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं को तबदील किए बिना और इंसानियत को नुकसान पहुंचाए बगैर जम्मू कश्मीर की समस्या का समाधान ढूंढा जा सकता है।

Mehbooba Mufti and Ghulam Nabi Azad contradict on Article 370 in jammu kashmir
Ghulam Nabi Azad - फोटो : सोशल मीडिया

राजनीतिक दल अनुच्छेद 370 पर लोगों को बेवकूफ न बनाएं- गुलाम नबी आजाद

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों से कहा कि वह घाटी में अनुच्छेद 370 के नाम पर बेवकूफ न बनाएं। आजाद के अनुसार जब संसद के दोनों हाउस में दो तिहाई बहुमत होगा तब अनुच्छेद 370 की बहाली हो सकती है और मौजूदा स्थिति में ऐसा हो नहीं सकता, क्योंकि अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के विरोध में केवल 77 वोट पड़े जबकि 370 के करीब वोट चाहिएं। उनके अनुसार यह कहना भी गलत होगा कि भाजपा ने अकेले 370 को हटाया।

आजाद के अनुसार यकीनन सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 बहाल हो सकता है पर तीन साल में आज तक कोई भी सुनवाई अनुच्छेद 370 पर उच्चतम न्यायालय में नहीं हुई, यह प्रक्रिया समय लेने वाली है। उनके अनुसार वह जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों से आग्रह करते हैं कि अनुच्छेद 370 के बजाय वह विकास को मुद्दा बनाएं।

गुलाम नबी आजाद ने उत्तरी कश्मीर और श्रीनगर के कई प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इन प्रतिनिधिमंडलों ने उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों के कई मुद्दों, शिकायतों और समस्याओं से अवगत कराया। कई सरपंचों के साथ गहन विचार-विमर्श और बैठकों के अलावा डीडीसी के सदस्य वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों की उपस्थिति में गुलाम नबी आजाद के साथ शामिल हुए।  

प्रतिनिधिमंडलों से प्रदेश में बेरोजगारी पर की चर्चा

प्रतिनिधिमंडलों ने जम्मू-कश्मीर में विकास, अनिश्चितता, बेरोजगारी में वृद्धि से संबंधित मामलों पर भी चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में आजाद के कार्यकाल के दौरान राज्य के सभी क्षेत्रों में हुए ऐतिहासिक विकास की सराहना की। आजाद ने उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया और उन्हें शीघ्र ही अपने निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करने का आश्वासन दिया। आजाद ने प्रत्येक प्रतिनियुक्ति को अलग-अलग धैर्यपूर्वक सुना, उनके पूरे दिल से समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और उनकी वास्तविक मांगों को पूरा करने में उन्हें अपना पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

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