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खरीदा गया चार 25 सितंबर तक खत्म करना होगा
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गुज्जर समुदाय की तरफ से आए दिन किसानों की फसल बर्बाद करने को लेकर शुक्रवार को गुज्जर समुदाय व किसान कमेटी की बैठक हुई। इसमें कमेटी प्रधान सहित कई किसान मौजूद रहे। गुज्जर समुदाय को खरीदा गया चार 25 सितंबर तक खत्म करना होगा।
बैठक थाना प्रभारी हरजीत सिंह की देख रेख में हुई। कमेटी प्रधान कमलजीत सिंह, बचन लाल व सोनू पंडित आदि ने कहा कि आए दिन गुज्जर समुदाय द्वारा मवेशी चराने के बहाने किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। इससे विवाद न भड़के, इसीलिए थाना प्रभारी की देखरेख में बैठक की गई, जिसमें सर्व सम्मति से यह समझौता हुआ कि समुदाय द्वारा खरीदा गया पशु चारे को 25 सितंबर तक खत्म करें। उसके बाद अगर किसानों से पशु चारा खरीदा जाता है तो खेत में मवेशी चराने के बजाय उन्हें चारे को काट कर मवेशियों तक पहुंचाया जाएगा। ताकि किसानों की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
समझौता मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लिखित में लिया गया है। इसके अलावा मवेशियों पर काबू रखने के लिए कुल्ले के चारों ओर तारबंदी भी करनी होगी। उल्लेखनीय है कि आए दिन गुज्जर समुदाय व किसानों के बीच फसल नुकसान को लेकर नोकझोंक होती आ रही है, जिसे रोकने के लिए यह समझौता किया गया है।
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क्या है मामला।
असल में गुज्जर समुदाय किसानों से पशु चारा खरीद कर अपने मवेशियों को खेतों में ही चराते हैं, जिससे रास्ते व आसपास खड़ी फसल को पार करके पशु खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे रास्ते में पड़ने वाले खेतों में खड़ी फसल बरबाद हो जाती है।
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बैठक थाना प्रभारी हरजीत सिंह की देख रेख में हुई। कमेटी प्रधान कमलजीत सिंह, बचन लाल व सोनू पंडित आदि ने कहा कि आए दिन गुज्जर समुदाय द्वारा मवेशी चराने के बहाने किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। इससे विवाद न भड़के, इसीलिए थाना प्रभारी की देखरेख में बैठक की गई, जिसमें सर्व सम्मति से यह समझौता हुआ कि समुदाय द्वारा खरीदा गया पशु चारे को 25 सितंबर तक खत्म करें। उसके बाद अगर किसानों से पशु चारा खरीदा जाता है तो खेत में मवेशी चराने के बजाय उन्हें चारे को काट कर मवेशियों तक पहुंचाया जाएगा। ताकि किसानों की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
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समझौता मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लिखित में लिया गया है। इसके अलावा मवेशियों पर काबू रखने के लिए कुल्ले के चारों ओर तारबंदी भी करनी होगी। उल्लेखनीय है कि आए दिन गुज्जर समुदाय व किसानों के बीच फसल नुकसान को लेकर नोकझोंक होती आ रही है, जिसे रोकने के लिए यह समझौता किया गया है।
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क्या है मामला।
असल में गुज्जर समुदाय किसानों से पशु चारा खरीद कर अपने मवेशियों को खेतों में ही चराते हैं, जिससे रास्ते व आसपास खड़ी फसल को पार करके पशु खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे रास्ते में पड़ने वाले खेतों में खड़ी फसल बरबाद हो जाती है।