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लुप्त हो रहे औषधीय पौधे किए जाएंगे संरक्षित, भद्रवाह में स्थापित हो रही आधुनिक नर्सरी

Tue, 12 Jan 2021 01:15 PM IST
प्रशांत कुमार अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 12 Jan 2021 01:15 PM IST
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medicinal plants will be preserved, modern nursery being established in Bhaderwah jammu kashmir
सांकेतिक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर में औषधीय पौधों को संरक्षित किया जाएगा। वर्तमान में बर्फबारी से लदे भद्रवाह के एक पहाड़ी क्षेत्र में जल्द आधुनिक नर्सरी स्थापित की जा रही है। यह प्रदेश की पहली औषधीय पौधों की नर्सरी है। इसकी खासियत यह होगी कि नर्सरी में कई लुप्त हो रहे औषधीय पौधों के साथ अन्य पौधों को संरक्षित किया जाएगा।

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इसके लिए आयुष मंत्रालय भारत सरकार ने पांच औषधीय पौधों की स्वीकृति दी है। इसके अलावा लुप्त व अन्य औषधीय पौधों को तैयार करने के लिए सीड (बीज) जर्म प्लाज्म केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है। बर्फ हटने के बाद फरवरी में दोनों प्रोजेक्टों पर काम शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए निविदाएं जारी की गई हैं।
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आधुनिक नर्सरी में उन औषधीय पौधों को तवज्जो दी गई है जिनकी देश विदेश में आयुष दवा उद्योग में भारी मांग है। यह औषधीय पौधे अधिकतर हिमालय शृंखला में लगते हैं। आयुष मंत्रालय की ओर से नर्सरी के लिए स्वीकृति मिलने वाले पौधों में पुष्करमूल (एंटीसेप्टिक व संक्रमण रोकथाम के लिए), पत्रिस (सामान्य ताकत का टॉनिक), रेबंद (जख्म व सूजन के लिए), कुछ (एंटीसेप्टिक, एंटी वायरल) और दारुल हलद (मधुमेह की रोकथाम के लिए) के लिए लाभदायक है।
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स्कास्ट जम्मू के वैज्ञानिकों की तकनीकी मदद से नर्सरी में पौधों का उत्पादन किया जाएगा। इसके लिए सेमी हाईटेक के तीन पाली हाउस स्थापित किए जाएंगे। इसमें पौधे लगाने के लिए विशाल चैंबर स्थापित होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए 25 लाख रुपये की राशि मंजूर हुई है, इसमें भारत सरकार की ओर से 22 लाख रुपये की राशि मिल भी चुकी है। जबकि तीन लाख रुपये प्रदेश सरकार से मिलेंगे।
 

औषधीय पौधों के बीज संरक्षित किए जाएंगे

सीड जर्म प्लाज्म केंद्र में उच्च पर्वतीय पौधों के अलावा अन्य औषधीय पौधों के बीज संरक्षित और उत्पादित किए जाएंगे। यह प्रक्रिया दस कनाल की जमीन पर की जाएगी। बीज के संरक्षण होने से बाद में इससे वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ किसानों को औषधीय पौधे लगाने के लिए सीधा लाभ मिलेगा। इन बीज के माध्यम से किसान अपनी छोटी नर्सरी भी तैयार कर सकेंगे।

भद्रवाह कस्बे से दस किमी दूर पहाड़ी क्षेत्र ठनटेरा में आधुनिक नर्सरी और प्लाज्म केंद्र स्थापित होगा। आईएसएम के निदेशक डॉ. मोहन सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए औषधीय पौधों का विस्तार किया जा रहा है। भद्रवाह में उच्च पर्वतीय औषधीय पौधा संस्थान पर काम हो रहा है। 

औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए वातावरण लाभदायक
भद्रवाह के जंगल और पहाड़ हिमालय शृंखला से जुड़े हैं। इसमें कई अनमोल औषधीय पौधे प्राकृतिक तौर पर लगते हैं, जिनकी आयुष जगत में भारी मांग है। इन पौधों के माध्यम से स्थानीय लोग पुरानी चिकित्सा पद्धति से लोगों का उपचार कर रहे हैं, लेकिन इन औषधीय पौधों का सही विस्तार नहीं हो पाया है। इन प्राकृतिक औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए भद्रवाह के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों का वातावरण अनुकूल रहा है। 

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