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जानिए, कैसे बना वो पहाड़ जिस पर आज विराजमान हैं माता वैष्णो देवी

Fri, 22 Sep 2017 12:11 PM IST
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय Updated Fri, 22 Sep 2017 12:11 PM IST
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mata vaishno devi seated 50 crore year old mountain
वैष्णो देवी

माता वैष्णो देवी जिस पवित्र त्रिकुटा पहाड़ पर विराजमान हैं उसका निर्माण 50 करोड़ साल पहले समुद्र के गर्भ में हुआ। बाद में भारतीय प्लेट के यूरेशिया की प्लेट से टकराने की वजह से यह करीब पांच करोड़ साल पहले बाहर आया।

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जियोलोजी की भाषा में इस पहाड़ का नाम सिरबन है। इस पर पाए जाने वाले पत्थरों को डोलोस्टोन (चूना पत्थर) के नाम से जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह कैल्शियम कार्बोनेट से बना है। इसमें काफी मात्रा में मैगनिशियम कार्बोनेट भी है।
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इस पहाड़ का अध्ययन करने वाले जम्मू विश्वविद्यालय के जियोलोजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर नवीन हक्कू ने बताया कि करीब 50 करोड़ साल पहले इस पहाड़ का निर्माण समुद्र के अंदर कई चरणों में हुआ। उस समय इस पूरे इलाके में गहरा समुद्र था।

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करोड़ों साल तक चलती रही पर्वत बनने की प्रक्रिया

mata vaishno devi seated 50 crore year old mountain

कैल्शियम कार्बोनेट के लगातार एक स्थान पर जमने के कारण इसका निर्माण शुरू हुआ। यह प्रक्रिया लगातार करोड़ों साल तक चलती रही और इसका निर्माण हुआ। इसकी उम्र का पता लगाने के लिए इस पर पाए गए ब्लू ग्रीन एलगी (शैवालों) के सूक्ष्म जीवाश्मों का अध्ययन किया गया।

इन शैवालों के सुक्ष्म बीज बाहर निकल आते हैं। इन बीजों के अध्ययन से पहाड़ की उम्र पता चलती है।। इसके अलावा लेड (शीशा), यूरेनियम और रेनियम जैसे तत्वों के अध्ययन से भी इसकी उम्र का पता लगाया गया। इन तत्वों की थोड़ी मात्रा त्रिकुटा पहाड़ की चटटनों में बची हुई है। उन्होंने बताया कि इन तत्वों की कम मात्रा का इसी से पता चलता है कि एक करोड़ कणों में से मात्र एक कण है।

इन तत्वों का पता लगाने के लिए रेडियोएक्टिविटी का अध्ययन किया जाता है। इसके तहत इन तत्वों के क्षरण से पता लगाया जाता है कि उसकी उम्र कितनी है। उदाहरण स्वरूप यूरेनियम लंबे समय के बाद शीशा बन जाता है।

समुद्र के अंदर से बाहर निकला पहाड़

mata vaishno devi seated 50 crore year old mountain

उन्होंने बताया कि भारतीय प्लेट के यूरेशिया की प्लेट से टकराने के कारण समुद्र के अंदर के पहाड़ बाहर निकल आए। उसी हिसाब से समुद्र भी पीछे हटता गया और पहाड़ों के साथ थल का हिस्सा भी बाहर आ गया।

इस लंबी प्रक्रिया की वजह से ही जिस पहाड़ पर माता वैष्णो देवी विराजमान हैं वह बाहर आया। इतने पुराने पहाड़ कई अन्य हिस्सों में भी मिलते हैं। मध्यप्रदेश की विंध्य रेंज, हिमाचल और पाकिस्तान के अनोटाबाद और मुजफ्फराबाद में भी मिलते हैं।

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