मसर्रत को जेल में भी मिलता था पाक से न्योता
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श्रीनगर में वर्ष 2010 में हुई पत्थरबाजी और वर्ष 2008 के अमरनाथ भूमि विवाद का मास्टरमाइंड और कश्मीरी अलगाववादी मसर्रत आलम जब जेल में कैद था तब भी उसे पाकिस्तान की ओर से मेहमान बनने का न्योता मिलता रहता था।
इस बार भी राष्ट्रीय दिवस के मौके पर दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग की ओर से हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं के साथ हाल ही में जेल से छूटे मर्सरत आलम को भी निमंत्रण भेजा गया था।
हालांकि रिहाई के बाद घाटी से लेकर दिल्ली तक मचे विवाद के चलते उसे पाक उच्चायोग आने की इजाजत नहीं मिली। हालांकि मर्सरत की गैरमौजूदगी को उसकी सेहत का सही नहीं होना बताया जा रहा है।
पाकिस्तान दिवस पर न्योता जेल में ही मिलता था
उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पिछले चार साल मर्सरत को पाक उच्चायुक्त का राष्ट्रीय दिवस पर न्योता जेल में ही मिलता रहा है। जम्मू कश्मीर की नई सरकार की राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की नीति के तहत मसर्रत की बारामूला जेल से रिहाई के बाद खासा हंगामा हुआ।
संसद के दोनों सदनों में अलगाववादी नेता को रिहा किए जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे प्रहार किए थे। गौरतलब है कि करीब तीन महीने तक चले 2010 की पत्थरबाजी की घटना में 112 लोगों की मौत हुइ थी।
मसर्रत सैयद अली शाह गिलानी की अगुवाई वाले हुर्रियत के कट्टर अलगाववादी गुट का सदस्य है। मसर्रत को गिलानी का उत्तराधिकारी माना जा रहा है।