बाजार से फिर 300 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी
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रियासत का वित्तीय संकट गहरा गया है। बाढ़ की मार से वाणिज्य कर की वसूली भी प्रभावित हुई। इस कारण आतंरिक संसाधन के नाम पर भी खजाना खाली ही है। नतीजतन बाजार से 300 करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी चल रही है। इस बाबत रिजर्व बैंक को आफ इंडिया को रियासत सरकार ने औपचारिक रूप से अवगत करा दिया है।
इस साल यह दूसरा मौका है जब सरकार को बाजार से ऋण लेना पड़ रहा है। पहले भी 300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है। वेतन, पेंशन और जरूरी स्थापना खर्च के लिए कर्ज का भार झेलना जरूरी बताया जा रहा है। रियासत की 7300 करोड़ की वार्षिक योजना को अबतक विधिवत मंजूरी नहीं मिल सकी है। राहत की बात यह है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय इस मद में विशेष योजना सहायता के रूप में लगभग 900 करोड़ रुपये जारी करने पर सहमत हो गया है।
रियासत सरकार ने बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास के लिए 44 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की मांग केंद्र से की है। इस पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है। वित्तीय संकट के मद्देनजर विकास की नई योजनाएं शुरू करने पर रोक है। सिर्फ चालू योजनाओं पर ही काम हो रहा।
900 करोड़ रुपये जारी होने का रास्ता साफ
वार्षिक योजना को मंजूरी नहीं मिल पाने के कारण योजनाएं ठप होने की स्थिति में पहुंच गई थी, तब रियासत सरकार ने जिलों को 50 फीसदी राशि खर्च करने को अधिकृत किया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब पांच महीने बचे हैं। चुनाव की घोषणा की स्थिति में आदर्श आचार संहिता इस महीने के अंत तक प्रभावी हो सकती है।
उसके बाद से विकास योजनाओं पर काम लगभग ठप हो जाएगा। योजना आयोग के विकल्प का स्वरूप तय नहीं हो पाने के कारण वार्षिक योजना अधर में लटकी है। प्रधानमंत्री पुनर्वास कार्यक्रम के 600 करोड़ रुपये भी जारी नहीं हुए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में रियासत सरकार ने विशेष योजना सहायता के लिए गुहार लगाई थी।
वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक अब 900 करोड़ रुपये जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। फिलहाल रियासत सरकार के समक्ष बाढ़ राहत कार्य और पुनर्वास की योजनाओं को तीव्र गति से लागू करने की चुनौती है। वेतन और पेंशन के भुगतान का दबाव भी बढ़ रहा है। वित्तीय संकट के कारण महंगाई भत्ता भी अधर में लटका है।
बाढ़ राहत-पुनर्वास की राशि प्रोजेक्टों पर देगा केंद्र
केंद्र सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए राशि का आवंटन प्रोजेक्टों के आधार पर जारी करने के संकेत दिए हैं। रियासत सरकार विशेष पैकेज के रूप में 44 हजार करोड़ रुपये चाहती है लेकिन केंद्र ने संबंधित प्रोजेक्ट तलब किया है।
प्रोजेक्टों पर राशि के आवंटन से रियासत सरकार का इस पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रह पाएगा। राशि का आवंटन कार्य कराने वाली एजेंसियों को भी जारी हो सकता है।
केंद्रीय टीम का दौरा शीघ्र संभव
बाढ़ से हुई क्षति के आकलन के लिए केंद्रीय टीम का रियासत दौरा शीघ्र संभव है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में टीम का गठन किया जा रहा है। इस टीम में नौ से अधिक विभागों के अधिकारी शामिल हैं। रियासत ने आपदा राहत फंड के इस्तेमाल के नियमों में ढील देने की मांग की है। इस पर केंद्र विचार कर रहा है।