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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   major forest fire in trikuta hill

वैष्णो देवी: अब हिमकोठी के निचले क्षेत्र में लगी आग

Wed, 18 May 2016 11:31 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/कटड़ा
ब्यूरो, अमर उजाला/कटड़ा Updated Wed, 18 May 2016 11:31 PM IST
सार

  • त्रिकुटा की पहाड़ियों पर फिर भड़की आग 
  • अर्धकुंवारी से भवन जाने वाले नए ट्रैक पर हिमकोठी के निचले क्षेत्र में आग
  • त्रिकुटा पहाड़ियों की आग पर काबू पाने में वायु सेना के दो हेलीकाप्टर लगे थे
  • सलाल डैम से छह बार 70-70 हजार लीटर पानी आग पर फेंका गया

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major forest fire in trikuta hill
यात्रा मार्ग के पास जंगलों में लगी आग - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

त्रिकुटा की पहाड़ियों पर लगी भीषण आग पर बुधवार शाम तक लगभग काबू पा लिया गया था, लेकिन, देर रात अर्धकुंवारी से भवन जाने वाले रास्ते पर हिमकोठी के निचले क्षेत्रों में भीषण आग भड़क उठी। आग की लपटें काफी ऊंची-ऊंची उठ रहीं हैं। जहां आग लगी है वहां से ट्रैक की दूरी आधा किलोमीटर बताई जाती है। हवा का रुख भी हिमकोठी की ओर है।
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सूचना मिलते ही तत्काल श्राइन बोर्ड के कर्मचारी आग पर काबू पाने में जुट गए हैं। कटड़ा हैलीपैड सहित भवन मार्ग पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है। यात्रा पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है।
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मंगलवार को लगी आग को बुझाने के लिए वायुसेना के दो हेलीकाप्टर सहित 200 से अधिक कर्मचारियों ने पूरी ताकत झोंक दी। बुधवार को श्राइन बोर्ड के आग्रह पर वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकाप्टरों से आग की चपेट वाले क्षेत्र में छह बार पानी का छिड़काव किया गया। प्रत्येक उड़ान में 70 हजार लीटर पानी सलाल झील से लाकर आग बुझाने के लिए डाला गया।
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​यात्रा तथा हेलीकाप्टर सेवा सुचारु रूप से चली: श्राइन बोर्ड

major forest fire in trikuta hill
आग पर काबू पाने की कोश‌िश जारी - फोटो : Amar Ujala
आग बुझाने के लिए श्राइन बोर्ड, सीआरपीएफ और वन विभाग के कर्मचारी जुटे थे। बुधवार तड़के से ही वायुसेना के हेलीकाप्टर भी आग पर काबू पाने को लगा दिए गए थे। आग को काबू में करने के लिए कर्मचारियों ने फायर बीटिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जो काफी कारगर साबित हुई। विशेषज्ञों के अनुसार आगजनी वाला क्षेत्र मानवीय पहुंच में नहीं था।

इसके कारण काउंटर फायर प्रक्रिया का इस्तेमाल संभव नहीं था, नहीं तो आग को जल्दी नियंत्रित किया जा सकता था। आगजनी वाला क्षेत्र भवन मार्ग से काफी दूर था। इससे माता वैष्णो देवी यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ा। हालांकि, मंगलवार की शाम को एहतियातन कटड़ा हैलीपैड से हेलीकाप्टरों को ककरयाल विश्वविद्यालय में शिफ्ट जरूर किया गया था।

श्राइन बोर्ड के प्रवक्ता के अनुसार त्रिकुटा की पहाड़ियों पर लगी आग के बाद भी यात्रा तथा हेलीकाप्टर सेवा सुचारु रूप से चली। 17 मई को 33241 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों के अलावा सीआरपीएफ विभिन्न स्थानों पर आग पर काबू पाने के लिए तैनात की गई थी। अर्धकुंवारी में स्थिति पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त सीईओ डॉ. एमके कुमार, डिप्टी सीईओ पंकज गुप्ता और ओएसडी राजिंदर सिंह कैंप कर रहे हैं। 
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