जम्मू कश्मीर में मौसम की बेरुखी से सिंचाई पर संकट
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रबी की फसलों की सिंचाई के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए किसानों का बारिश का इंतजार और लंबा खिंचने वाला है। मौसम विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिले में पंद्रह दिसंबर तक बारिश के आसार नहीं के बराबर हैं। इससे 46 हजार हेक्टेयर पर मुख्य रूप से होने वाली गेहूं की खेती दाव पर लग चुकी है।
पहाड़ी इलाकों का हाल और भी बुरा है। जिले की पांच हजार हेक्टेयर पहाड़ी भूमि पर होने वाली खेती इस सीजन में नुकसान की आशंका है। इसके साथ किसानों की आखिरी उम्मीद ने भी साथ नहीं दिया। पहाड़ी इलाकों में मौसम कोहरे और बर्फबारी का है।
फसल की हर हाल में संभावना न के बराबर हो चुकी है। जिले का पच्चीस हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि का हिस्सा सीधे तौर पर बारिश के रहमोकरम पर निर्भर करता है, जबकि हीरानगर और कठुआ की लगभग बीस हजार पांच सौ पंद्रह हेक्टेयर भूमि पर किसानों के पास सिंचाई के लिए विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन, कुल फसल से देखा जाए, तो साठ से सत्तर फीसदी कृषि योग्य भूमि इस बार प्रभावित हुई है।
मैदानी इलाकों में भी दिक्कतें आने की आशंका
विभाग से बीज खरीद चुके किसान भी परेशान हैं। बारिश न होने का सबसे अधिक असर बसोहली, बिलावर, महानपुर सहित कंडी के इलाकों को भी पड़ा है। यहां अस्सी फीसदी से अधिक किसान बारिश के होने की आस में रोज आसमान की तरफ देखते हैं, लेकिन खुश्क मौसम किसानों की सुनने को तैयार ही नहीं है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार किसानों को भारी नुकसान होने का अनुमान है।
कृषि विज्ञान केंद्र की एग्रोमेट यूनिट के अनुसार मौसम इस सप्ताह भी किसानों के हक में नहीं है। पंद्रह दिसंबर तक जिले भर में बारिश के आसार शून्य के बराबर हैं। मैदानी इलाकों में भी तापमान लुढ़कने की संभावना है। न्यूनतम तापमान सात से आठ डिग्री और अधिकतम तापमान बीस से बाइस डिग्री रहने की संभावना जताई गई है।