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कश्मीरी मुसलमानों ने पेश की मिसाल, शिवरात्रि पर की मंदिरों की सफाई
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 24 Feb 2017 11:11 PM IST
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मंदिर की सफाई करते कश्मीरी मुसलमान
- फोटो : Amar Ujala
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उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सुंबल इलाके में महाशिवरात्रि पर एक बार फिर से सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल देखने को मिली।
कश्मीरी समुदाय के लोगों ने क्षेत्र के नंद किशोर मंदिर परिसर की सफाई की। वे हाथों में अंग्रेजी में लिखी तख्तियां लिए हुए थे जिस पर लिखा था कि लेट्स सेलिब्रेट नेक्सट हेरथ टुगेदर (अगली शिवरात्रि हम एकसाथ मनाएंगे)।
इस अवसर पर स्थानीय निवासी ग़ुलाम मोहम्मद ने कहा कि कश्मीर हमेशा से रिवायती भाईचारे का प्रतीक रहा है और कश्मीरी पंडित हमारे समाज का हिस्सा रहे हैं। उनके बिना हम अधूरे हैं और हमारे बिना वे। इसलिए हम चाहते हैं कि वह लोग वापिस आएं ताकि वह रिवायती भाईचारा फिर से कायम हो और अगली शिवरात्रि हम एक साथ मनाएं।
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कश्मीरी समुदाय के लोगों ने क्षेत्र के नंद किशोर मंदिर परिसर की सफाई की। वे हाथों में अंग्रेजी में लिखी तख्तियां लिए हुए थे जिस पर लिखा था कि लेट्स सेलिब्रेट नेक्सट हेरथ टुगेदर (अगली शिवरात्रि हम एकसाथ मनाएंगे)।
इस अवसर पर स्थानीय निवासी ग़ुलाम मोहम्मद ने कहा कि कश्मीर हमेशा से रिवायती भाईचारे का प्रतीक रहा है और कश्मीरी पंडित हमारे समाज का हिस्सा रहे हैं। उनके बिना हम अधूरे हैं और हमारे बिना वे। इसलिए हम चाहते हैं कि वह लोग वापिस आएं ताकि वह रिवायती भाईचारा फिर से कायम हो और अगली शिवरात्रि हम एक साथ मनाएं।
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जगती में मुसलमानों ने कश्मीरी पंडितों के साथ मनाई शिवरात्रि
महाशिवारात्रि
- फोटो : FILE PHOTO
उधर, कश्मीर से मुसलमानों के एक ग्रुप ने जम्मू के जगती पहुंचकर कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच शिवरात्रि मनाई। उन्होंने कश्मीरी पंडितों को अखरोट तथा नंदड़ूू (कमल के फूल का तना) दी।
स्वयंसेवी संगठन मदर हेल्पेज के बैनर के तहत पहुंचे कश्मीरी मुसलमानों ने पंडित समुदाय को शिवरात्रि की मुबारकवाद दी। संस्था के रिजवान हुसैन ने बताया कि कश्मीर की संस्कृति हिंदू और मुसलमानों की रही है। वे चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित फिर से घाटी में बसें और भाईचारे की भावना प्रबल हो। फिर से मिली जुली संस्कृति के तहत कश्मीर का गौरव लौटे।
स्वयंसेवी संगठन मदर हेल्पेज के बैनर के तहत पहुंचे कश्मीरी मुसलमानों ने पंडित समुदाय को शिवरात्रि की मुबारकवाद दी। संस्था के रिजवान हुसैन ने बताया कि कश्मीर की संस्कृति हिंदू और मुसलमानों की रही है। वे चाहते हैं कि कश्मीरी पंडित फिर से घाटी में बसें और भाईचारे की भावना प्रबल हो। फिर से मिली जुली संस्कृति के तहत कश्मीर का गौरव लौटे।