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जम्मू कश्मीर: प्रदेश में आधी भी नहीं खुलीं शराब की दुकानें, 18 दिन में 100 करोड़ की चपत
Tue, 19 Apr 2022 11:52 AM IST
kumar गुलशन कुमार
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 19 Apr 2022 11:52 AM IST
सार
लाइसेंस हासिल करने के लिए बैंक खातों की जानकारी नहीं दे पा रहे बोली लगाने वाले दुकानदार। इसके चलते शराब के लिए मारामारी हो रही है। कई दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
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Liquor consumption
- फोटो : social media
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विस्तार
प्रदेश की नई आबकारी नीति दूसरे साल भी पटरी पर उतरती नजर नहीं आ रही। दस्तावेज पूरे करने के पेंच में फंसे शराब की दुकानों के लाइसेंस आबकारी विभाग के गले की फांस बन रहे हैं। बोली लगाने वालों की आधी से ज्यादा दुकानें नहीं खुल पाई हैं, जिससे राजस्व में नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले ही महीने विभाग को 100 करोड़ रुपये की चपत लग गई है। ऐसे में एक तरफ राजस्व में कमी आ रही है तो दूसरी ओर शराब महंगे दाम पर बिक रही है। दुकानों के बाहर लंबी लाइनें लगी हैं।
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जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग ने वर्ष 2022 के लिए 1500 करोड़ रुपये की वसूली करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन ऐसा तभी संभव था जब सभी 279 दुकानें खोली जातीं। पहले तो इन सभी दुकानों के लिए 251 दुकानदार ही बोली का पैसा जमा कराने में सफल हुए। 28 दुकानदारों ने पैसे ही जमा नहीं कराए। 251 दुकानों में भी अभी तक 100 के करीब दुकानें खुली हैं, क्योंकि बाकी के दुकानदार दस्तावेज ही पूरे नहीं कर पा रहे, जबकि 28 दुकानों की दोबारा बोली लगाने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई।
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इस वजह से विभाग को हर रोज औसतन 4 से 5 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। सभी दुकानें न खुलने से विभाग को अब तक करीब 100 करोड़ का नुकसान हो चुका है। आगे भी ये दुकानें नहीं खुलीं तो यह नुकसान और बढ़ सकता है। आबकारी विभाग ने सबसे अधिक बोली लगाकर लाइसेंस हासिल करने वालों के बैंक खातों की जानकारी मांगी थी। यह जानकारी सभी बोली लगाने वाले नहीं दे पा रहे हैं। इसकी वजह से दुकानें खुलने में वक्त लग रहा है।
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महंगी मिल रही शराब, क्वालिटी में भी घटिया
वाइन शाप एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चरणजीत सिंह का कहना है कि पहले तो सभी दुकानें वक्त पर खोलने में विभाग असफल रहा। नई नीति लागू होने के बाद से शराब की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। घटिया क्वालिटी की शराब बिक रही है, जिसके दाम भी मनमाने वसूले जा रहे हैं। ऐसे में सरकार को घाटा तो होगा ही। सरकार को ऐसा तंत्र विकसित करना होगा, जिससे 31 मार्च से पहले ही नई दुकानें खुलने की रूपरेखा तैयार कर ली जाए।
दस्तावेज पूरा करने में लग रहा वक्त
दुकानें खोलने के लिए पहले से ही प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन बोली लगाने वाले जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं कर पा रहे। इसकी वजह से दुकानें खुलने में वक्त लग रहा है। रही बात दुकानों पर अधिक वसूली की तो इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जरूरी कार्रवाई होगी। - अटल डुल्लू, आयुक्त वित्त विभाग।
पिछली बार लगी थी 700 करोड़ की चपत
वर्ष 2020 में विभाग ने 2 हजार करोड़ रुपये की वसूली शराब की दुकानों से की थी, लेकिन 2021 में नई आबकारी नीति के चलते कई महीनों तक दुकानें नहीं खुल पाईं। साथ ही कोरोना की वजह से दुकानें महीनों बंद रहीं। इसकी वजह से विभाग को सिर्फ 1300 करोड़ ही मिल सके। इस बार भी वर्ष के शुरुआत में ही 100 करोड़ रुपये का घाटा हो गया है।