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पिछले साल की तरह इस बार भी बने सूखे के हालात, 70 दिनों से नहीं हुई बारिश

Sat, 04 Nov 2017 11:32 PM IST
एस खजूरिया, अमर उजाला/ कठुआ
एस खजूरिया, अमर उजाला/ कठुआ Updated Sat, 04 Nov 2017 11:32 PM IST
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Like last year, the situation of drought turned out not even 70 days, rain
- फोटो : bbc

किसानों से इस बार भी मौसम खफा नजर आ रहा है। बारिश नहीं होने से जिले भर में इस बार भी सूखे के हालात बनने लगे हैं। अक्तूबर की ही तरह नवंबर का पहला पखवाड़ा भी बारिश की संभावनाओं से कोसों दूर है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले सप्ताह में भी बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में रबी की फसल की बिजाई पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में खेती का यह सीजन भी पिछले साल की तरह चौपट होने की कगार पर है। 

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2 सितंबर को जिले में रिकार्ड बारिश के बाद 70 दिन का जो समय निकल रहा है, उसमें पानी की  एक बूंद नहीं बरसी। इससे तोरिया, चना और सरसों की खेती प्रभावित हुई है। सबसे अधिक नुकसान कंडी क्षेत्र के किसानों को हो रहा है, जिनकी फसल पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। अक्तूबर महीने में सरसों, तोरिया और चने की बिजाई की जाती है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसान अब तक बिजाई नहीं कर पाए हैं। इस सप्ताह बारिश की कोई संभावना नहीं होने से किसानों की बची हुई आस भी टूट चुकी है। 
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किसानों पर मौसम की मार यहीं खत्म नहीं होतीं। बारिश नहीं होने से रबी की फसल की बिजाई भी प्रभावित होने वाली है। गेंहू की बिजाई के लिए 25 अक्तूबर से 20 नवंबर तक का समय किसानों के पास होता है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के तीनों खित्तों में 9 दिसंबर तक बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो उसके बाद भी कई दिनों तक बारिश के आसार नहीं हैं। ऐसे में खासकर कंडी क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता का विषय है। 

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पिछले साल से भी कम हुई इस साल बारिश

वर्ष 2016 के दौरान जहां साल भर में 1541 एमएम बारिश कठुआ में रिकार्ड की गई थी वहीं वर्ष 2017 में अबतक बारिश का पैमाना 1000 एमएम को भी पार नहीं कर पाया है। ऐसे में साफ है कि धरती प्यासी है और फसल की उर्वरता पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। मौसम में हो रहा इस तरह का बदलाव सूखे की ओर ले जाता दिख रहा है।

इस साल जनवरी में जहां 1.5एमएम बारिश रिकार्ड की गई वहीं फरवरी में 4.6, मार्च में 49.2 एमएम बारिश हुई। अप्रैल का महीना सूखा गुजरा तो मई में 52 एमएम बारिश हुई। जून में 135.2, जुलाई में 281.8 और अगस्त में 463.8 एमएम बारिश होने से किसानों को इस साल के आखिरी महीनों में भी बारिश की जरूरत अनुसार अच्छी संभावनाएं नजर आ रही थीं। लेकिन सितंबर और अक्तूबर का महीना सूखा निकल गया। अब नवंबर का पहला पखवाड़ा भी बारिश की बूंदें बरसाता नजर नहीं आ रहा है। 

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