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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Like drugs, drug trafficking is also a major challenge in Jammu and Kashmir.

हर साल हजारों बेजुबान लहूलुहान: नशे की तरह मवेशी तस्करी भी बड़ी चुनौती, हाईवे बना अवैध कॉरिडोर

Sun, 26 Apr 2026 12:19 PM IST
Nikita Gupta अरुण कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अरुण कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 26 Apr 2026 12:19 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में मवेशी तस्करी नशे की तरह एक संगठित अपराध बन चुकी है, जिसमें लखनपुर से बनिहाल तक फैला नेटवर्क सक्रिय है और हर साल हजारों पशु इसका शिकार हो रहे हैं। पिछले सात वर्षों में पुलिस ने हजारों मवेशियों को बचाया और हजारों तस्करों को गिरफ्तार किया है लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग इस अवैध कारोबार का ट्रांजिट कॉरिडोर बना हुआ है।

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Like drugs, drug trafficking is also a major challenge in Jammu and Kashmir.
जम्मू-कश्मीर पुलिस - फोटो : निकिता गुप्ता

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में नशे की तरह मवेशी तस्करी भी बड़ी चुनौती है। हर साल हजारों बेजुबान अवैध तस्करी के इस कारोबार का शिकार होकर लहूलुहान हो रहे हैं। पुलिस की नाकेबंदी, गश्त और कार्रवाई के बावजूद यह एक संगठित अपराध बना चुका है। तस्कर पेशेवर अपराधियों की तरह सक्रिय हैं।

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प्रदेश के प्रवेश द्वार लखनपुर से लेकर कश्मीर संभाग के प्रवेश द्वार बनिहाल तक तस्करों का मजबूत नेटवर्क है। पिछले सात वर्षों में कठुआ, सांबा, जम्मू, डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिले में 68 हजार से अधिक मवेशी तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए हैं। 7767 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। आरटीआई से मिले आंकड़े बताते हैं कि जम्मू संभाग के इन छह जिलों में मवेशी तस्करी का अवैध कारोबार बढ़ा है।
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पंजाब की सीमा से सटे लखनपुर से लेकर जम्मू तक राष्ट्रीय राजमार्ग पशु तस्करों के लिए सुरक्षित ट्रांजिट कॉरिडोर बन गया है। लखनपुर से तस्करी का यह खेल शुरू होता है जो जम्मू संभाग के पांच थानों के 50 से अधिक नाकों से होते हुए कश्मीर तक चलता है। यह तस्करी कितने बड़े पैमाने पर होती है इसकी गवाही खुद पुलिस विभाग के आंकड़े दे रहे हैं।
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पुलिस की मजबूत नाकेबंदी के दावों के बावजूद इस नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हैं कि पिछले सात वर्षों (2019 से मार्च 2026 तक) में इस रूट पर चार हजार से अधिक पशु तस्करी के प्रयास हुए जिन्हें पुलिस नाकाम करने में कामयाब हुई है। तस्कर ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों में मवेशियों को डालकर लखनपुर से जम्मू-कश्मीर में दाखिल होते हैं।

ग्रामीण इलाकों से तस्कर मवेशी लेकर आते हैं। ज्यादातर मवेशियों को कश्मीर ले जाया जाता है। आरटीआई के अनुसार कठुआ जिले की पुलिस ने सात वर्षों में मवेशी तस्करी के 1,076 एफआईआर दर्ज की हैं। इस दौरान 11,017 मवेशियों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया है।

1,214 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जिले के राजबाग पुलिस थाने में सबसे ज्यादा 405 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कठुआ से जो तस्कर पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर आगे निकल जाते हैं वे सांबा से होते हुए जम्मू की ओर भागते हैं। सांबा जिले में भी पुलिस ने इन सात वर्षों में 768 एफआईआर दर्ज कर 6,784 मवेशी बचाए और 841 लोगों को गिरफ्तार किया है। 

तस्करों के 3687 निजी व व्यावसायिक वाहन सीज
तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए तीनों जिलों की पुलिस ने इस दौरान 3,687 व्यावसायिक और निजी वाहनों को जब्त किया है। रेस्क्यू किए गए मवेशियों को कठुआ के कीड़ियां गंडियाल और जम्मू के इंदिरा नगर व भगवती नगर स्थित गोशालाओं में सुरक्षित पहुंचाया गया है। पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि ज्यादातर मामलों में अदालतों में चार्जशीट दायर हो चुकी है लेकिन आंकड़ों की यह भयावहता सिस्टम के सामने अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

रामबन बना ट्रांजिट हब, सात साल में 32 हजार बेजुबान बचाए
मवेशी तस्करी बड़ी चुनौती है। रामबन जिले में 2019 से 2026 मार्च तक 32 हजार से अधिक मवेशी तस्करों से बचाए गए हैं। 2226 वाहन जब्त जबकि 2566 तस्कर गिरफ्तार किए हैं। इसी तरह डोडा जिले में 2964 मवेशी बचाए, 75 वाहन जब्त किए। 472 तस्कर गिफ्तार किए। किश्तवाड़ जिले में 1081 मवेशी बचाए गए। 46 वाहन जब्त और 229 तस्कर गिरफ्तार किए गए।

जम्मू पहुंचते-पहुंचते होती है सबसे बड़ी धरपकड़
इस पूरे कॉरिडोर में तस्करों पर सबसे बड़ा प्रहार जम्मू पहुंचते-पहुंचते होता है। कठुआ और सांबा के पुलिस से बच निकलने वाली सबसे ज्यादा खेप जम्मू जिले में ही पकड़ी जाती है। यही कारण है कि सबसे बड़ी रिकवरी भी यहीं दर्ज की गई है। जम्मू पुलिस ने 2,363 मामलों में 18,357 मवेशी मुक्त कराए हैं और सबसे अधिक 2,532 तस्करों को हथकड़ी पहनाई है। जिले में 2023 में सबसे ज्यादा 484 मवेशी तस्करों की गिरफ्तारी हुई है।

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