{"_id":"585949a14f1c1b1f64e39d5a","slug":"life-restoring-in-kashmir-valleyy","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कश्मीर घाटी में अलगाववादियों के बंद का कम हो रहा असर, बाजारों में रौनक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कश्मीर घाटी में अलगाववादियों के बंद का कम हो रहा असर, बाजारों में रौनक
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Tue, 20 Dec 2016 08:39 PM IST
विज्ञापन
बाजारों में रौनक
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर घाटी में पिछले करीब छह महीने से रही अशांति के बाद अब घाटी में आम जनजीवन पटरी पर लौटता दिख रहा है। आए दिन बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है और दफ्तरों में भी कार्य सामान्य रूप से होता दिख रहा है। अलगाववादियों द्वारा पिछली बार जारी किए गए कैलेंडर पर भी लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
श्रीनगर समेत घाटी के लगभग सभी हिस्सों में आए दिन सामान्य जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। अधिकतर कारोबारी इदारे, स्कूल, कॉलेज आदि खुल रहे हैं और साथ ही यातायात भी सड़कों पर देखने को मिल रहा है। यहां तक कि सरकारी और निझी दफ्तरों में भी कामकाज सामान्य तौर पर अब हो रहा है। किसी हद तक रेल सेवाओं भी पूरी तरह से बारामुला से बनिहाल के बीच चलना शुरू हो गई है।
कश्मीर के अलगाववादी नेता जो इन खराब हालातों में लोगों का मार्गदर्शन कर रहे थे, उनके द्वारा हाल ही में जारी किए गए कैलेंडर से लोगों में विभी राए देखने को मिल रही है। स्थानीय कारोबारी मोहम्मद इस्माइल के अनुसार क्या मिला अलगाववादियों को पिछले कई महीने तक प्रदर्शन कैलेंडर जारी करके।
विज्ञापन
इससे केवल मासूम बच्चों की जाने गवाई हमने हासिल कुछ नहीं हुआ। उनके अनुसार भारी नुकसान का भी सामना करना पड़ा। एक और स्थानीय फारूक अहमद के अनुसार जोकि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, का कहना है कि हमारा तो सीजन खतम हुआ गर्मियों में, अब कैलेंडर में छूट देने से क्या फायदा। हम आगे भी तैयार थे लेकिन अलगाववादियों की नीयत में खोट आ गया है।
वर्ष 2008, 2010 और अब 2016 में इनहोने कश्मीरियों के खून को बेचा है। जैसे हालात इस समय घाटी में चल रहे हैं, उससे उम्मीद लगाई जा सकती है कि आने वाले एक महीने के भीतर हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे। अब देखना यह भी होगा कि अलगाववादियों के नए कैलेंडर में कितनी छूट रहेगी।
विज्ञापन
श्रीनगर समेत घाटी के लगभग सभी हिस्सों में आए दिन सामान्य जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। अधिकतर कारोबारी इदारे, स्कूल, कॉलेज आदि खुल रहे हैं और साथ ही यातायात भी सड़कों पर देखने को मिल रहा है। यहां तक कि सरकारी और निझी दफ्तरों में भी कामकाज सामान्य तौर पर अब हो रहा है। किसी हद तक रेल सेवाओं भी पूरी तरह से बारामुला से बनिहाल के बीच चलना शुरू हो गई है।
विज्ञापन
कश्मीर के अलगाववादी नेता जो इन खराब हालातों में लोगों का मार्गदर्शन कर रहे थे, उनके द्वारा हाल ही में जारी किए गए कैलेंडर से लोगों में विभी राए देखने को मिल रही है। स्थानीय कारोबारी मोहम्मद इस्माइल के अनुसार क्या मिला अलगाववादियों को पिछले कई महीने तक प्रदर्शन कैलेंडर जारी करके।
विज्ञापन
इससे केवल मासूम बच्चों की जाने गवाई हमने हासिल कुछ नहीं हुआ। उनके अनुसार भारी नुकसान का भी सामना करना पड़ा। एक और स्थानीय फारूक अहमद के अनुसार जोकि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, का कहना है कि हमारा तो सीजन खतम हुआ गर्मियों में, अब कैलेंडर में छूट देने से क्या फायदा। हम आगे भी तैयार थे लेकिन अलगाववादियों की नीयत में खोट आ गया है।
वर्ष 2008, 2010 और अब 2016 में इनहोने कश्मीरियों के खून को बेचा है। जैसे हालात इस समय घाटी में चल रहे हैं, उससे उम्मीद लगाई जा सकती है कि आने वाले एक महीने के भीतर हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे। अब देखना यह भी होगा कि अलगाववादियों के नए कैलेंडर में कितनी छूट रहेगी।