जम्मू-कश्मीर एलजी बोले: कब्जामुक्त अभियान में रसूखदारों को बख्शा नहीं जाएगा, गरीबों को छेड़ा नहीं जाएगा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर 31 जनवरी तक इन सभी जमीनों से अतिक्रमण हटाने का सरकार ने आदेश दिया है। इसमें कई रसूखदार, कई पूर्व मंत्री (सभी पार्टियों के), पूर्व विधायकों, पूर्व व वर्तमान नौकरशाह, पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
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जम्मू-कश्मीर में रोशनी, सरकारी व काचराई जमीन को कब्जा मुक्त कराने के अभियान की उप राज्यपाल मनोज सिन्हा 19 जनवरी को समीक्षा करेंगे। इसके लिए श्रीनगर में सभी उपायुक्तों की बैठक बुलाई गई है। इस बीच, अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया है कि रसूखदारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन किसी भी गरीब तथा वास्तविक जरूरतमंदों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा। सरकार उनकी चिंताओं से वाकिफ है। कोर्ट के आदेश पर 31 जनवरी तक इन सभी जमीनों से अतिक्रमण हटाने का सरकार ने आदेश दिया है। इसमें कई रसूखदार, कई पूर्व मंत्री (सभी पार्टियों के), पूर्व विधायकों, पूर्व व वर्तमान नौकरशाह, पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। इससे हड़कंप मचा हुआ है।
विभिन्न पार्टियों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित कश्मीर संभाग होगा। यहां बारामुला व अनंतनाग जिले में लोगों ने जमीनों को लीज पर लिया है, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। यहां व्यापक पैमाने पर कब्जा भी किया गया है।
जितनी जमीन की लीज है उससे कहीं अधिक पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। कई होटल भी बनाए जा चुके हैं।जम्मू संभाग में भी कई रसूखदारों ने सरकारी जमीन पर कब्जा जमा रखा है। जम्मू के बठिंडी, चौआदी, सुंजवां, सिद्दड़ा, छन्नी रामा में सरकारी व जंगलात की जमीन पर कब्जा कर रखा है।
इनमें रोशनी एक्ट के अलावा जंगलात की जमीन भी शामिल है। नेकां, पीडीपी, कांग्रेस, भाजपा के अलावा अन्य पार्टियों के नेताओं के नाम भी इसमें हैं। दरअसल इन जमीनों पर होटल, मॉल, बैंक्वेंट हॉल, शिक्षण संस्थान तक बना लिए गए हैं।
पिछले दिनों सरकार ने सभी सरकारी जमीनों का लीज समाप्त कर दिया था और जमीन वापस लेने का फैसला किया गया था। गुलमर्ग तथा पहलगाम में कई होटल लीज की जमीन पर बने हैं, जिनका लीज समाप्त कर दिया गया है।
सरकार ने नौ जनवरी को आदेश जारी कर 31 जनवरी तक इसे मुक्कमल बनाने को कहा था। इस वजह से विभिन्न जिलों के डीसी की ओर से सूची जारी कर कब्जा हटाने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी इसके खिलाफ गत सोमवार को याचिका दायर कर सुनवाई की मांग की गई थी, जिस पर सर्वोच्च अदालत ने सहमति दे दी है।
दिवंगत पूरन कृष्ण भट की पत्नी को सौंपा नियुक्ति पत्र
दक्षिण कश्मीर के शोपियां में आतंकी हमले में मारे गए कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट की पत्नी स्वीटी भट को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को सरकारी नौकरी का नियुक्ति सौंप दिया।
उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार दिवंगत पूरन कृष्ण भट के परिवार के साथ खड़ी हैं और भविष्य में उनकी हरसंभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है।
पिछले साल 15 अक्तूबर को चौधरी गुंड इलाके में आतंकियों ने कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट को उस समय गोली मार कर लहूलुहान कर दिया था जब वह अपने बाग की ओर जा रहे थे। हमले को अंजाम देकर आतंकी भाग निकले थे । घायल पूरण भट को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी मौत हो गई थी