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जम्मू विश्वविद्यालय: विचार नई संपत्ति हैं, पाठ्यक्रम के बजाय रचनात्मकता से संचालित हो शिक्षा- उपराज्यपाल

Tue, 12 Mar 2024 06:11 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 12 Mar 2024 06:11 PM IST
सार

उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा को पाठ्यक्रम के बजाय रचनात्मकता से संचालित होना चाहिए ताकि युवाओं के भीतर की सृजनात्मकता को विकसित किया सके

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lg manoj sinha said Education should be driven by creativity rather than by curriculum
जम्मू विश्वविद्यालय - फोटो : अभिषेक बड़ू

विस्तार

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को 'शैक्षणिक प्रशासकों के नेतृत्व विकास' पर तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा को पाठ्यक्रम के बजाय रचनात्मकता से संचालित होना चाहिए ताकि युवाओं के भीतर की सृजनात्मकता को विकसित किया सके

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उन्होंने कहा, “विचार नई संपत्ति हैं और विश्वविद्यालयों को बौद्धिक संपदा बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों की रचनात्मक, नवोन्वेषी क्षमता विकसित करने और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने वाले कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।'
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उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश हमारे छात्रों को सर्वोत्तम पाठ्यक्रम देने और उन्हें दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।
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उपराज्यपाल ने कार्यशाला के आयोजन के लिए जम्मू विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) के सामूहिक प्रयास की सराहना की, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन और उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जम्मू कश्मीर देश के शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र में सुधारों का नेतृत्व कर रहा है।

उपराज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को कौशल विकास और नवाचार के केंद्र में बदलने और जम्मू कश्मीर के युवाओं की असीमित क्षमता को साकार करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का आह्वान किया।

प्रख्यात शिक्षाविदों और संस्थानों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल ने भविष्योन्मुखी शिक्षा के लिए एक मजबूत नींव बनाने के लिए पांच उद्देश्यों और दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, "कक्षाएं कल्पना को सक्षम करने वाली होनी चाहिए। 21वीं सदी में फलने-फूलने के लिए शिक्षण संस्थानों का मुख्य फोकस न केवल शिक्षण होना चाहिए, बल्कि मार्गदर्शन भी होना चाहिए।"


इस अवसर पर, उपराज्यपाल ने शिक्षण समुदाय, छात्रों और सभी हितधारकों से जम्मू कश्मीर को एक ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ काम करने और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में विदेशी छात्रों के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर भी जोर दिया।

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