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सरहद पार से अब नहीं आती कोई पाती

Tue, 29 Jul 2014 12:00 PM IST
Updated Tue, 29 Jul 2014 12:00 PM IST
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letter did not received across the border

एक दिसंबर, 1947 को रेडियो कश्मीर जम्मू की स्थापना हुई। तब से लेकर अब तक पंजाबी कार्यक्रम को प्रसिद्धि अपने देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ सरहद के उस पार में भी मिलती रही है।

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इसकी पुष्टि पंजाबी कार्यक्रम में आने वाले ‘त्वाड़ी चिट्ठी त्याड़े फोन’ से होती है। एक जमाना हो गया जब सियालकोट से बाबा खान की चिट्ठी रेडियो कश्मीर जम्मू तक नहीं पहुंची।
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पंजाबी कार्यक्रम के एक और श्रोता थे जो लाहौर के रहने वाले थे, जिनकी चिट्ठी एक अरसे से नहीं आ पा रही है। इसके बारे में पंजाबी कार्यक्रम अधिकारी नितीश अरोड़ा बताते हैं कि इस संबंध में कुछ कहा नहीं जा सकता कि अब चिट्ठियां आनी बंद क्यों हो गईं।
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सरहद पार तक सुना जाता था ‘त्वाड़ी चिट्ठी त्याड़े फोन’

letter did not received across the border

हालांकि इस पंजाबी कार्यक्रम का प्रसारण जब से आरंभ किया गया, तब से लेकर अब तक देश के विभिन्न राज्यों पंजाब, हिमाचल, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि स्थानों के श्रोता इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए पत्र लिखते हैं।

हर रविवार साढ़े नौ बजे पंजाबी कार्यक्रम ‘त्वाड़ी चिट्ठी त्याड़े फोन’ प्रसारित होता है। आधे घंटे के इस कार्यक्रम को लेकर कार्यक्रम अधिकारी रवि मगोत्रा का कहना है कि रेडियो कश्मीर जम्मू की स्थापना 1947 में हुई।

 तब से लेकर अब तक पंजाबी कार्यक्रम सप्ताह में चार बार रविवार, सोमवार, मंगलवार एवं शुक्रवार की रात साढ़े नौ बजे प्रसारित होता है। इसके आरंभिक पात्र अब नहीं हैं।

महमूद अहमद, वेद गुप्ता, यश शर्मा तो अब नहीं रहे लेकिन रीटा यूसुफ, जितेंद्र कौर तथा रमणी शर्मा पंजाबी कार्यक्रम के बारे में अपने अनुभवों को बताते हैं। वहीं, रानी नगेंद्र कहीं विदेश में रहने लगी हैं।

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