कश्मीर में पनाह के लिए घुसपैठ की ताक में लश्कर आतंकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद पर सख्ती के बाद आतंकियों ने कश्मीर में पनाह के लिए घुसपैठ की कोशिशें तेज कर दी हैं। पुंछ के केरी सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश में एक आतंकी के ढ़ेर होने के बाद से सेना ने एलओसी पर गश्त बढ़ा दी है। बार्डर पर बीएसएफ को भी अलर्ट किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान में हाफिज को नजरबंद किए जाने के बाद पीओके में लश्कर के कैंपों में हलचल बढ़ी है। सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि लश्कर के आतंकी कश्मीर में अपने संरक्षकों की मदद से महफूज ठिकानों में पनाह ले सकते हैं। इस क्रम में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की कोशिशें हो सकती हैं।
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर आतंकियों को अब भी पाकिस्तान सेना की मदद मिल रही है। एलओसी और बार्डर पर घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान सेना द्वारा छिटपुट रूप से सीजफायर का उल्लंघन हो रहा है।
पिछले साल 110 आतंकी घुसपैठ में सफल
घुसपैठ के दृष्टिकोण से पुंछ और उड़ी सेक्टर को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है। गृह मंत्रालय के दस्तावेज बताते हैं कि एलओसी और बार्डर पर सख्त पहरे के बावजूद पिछले साल 110 आतंकी घुसपैठ में सफल रहे थे।
जनवरी और फरवरी माह में सीजफायर उल्लंघन की एक दर्जन घटनाओं के क्रम में 15 आतंकियों की घुसपैठ की आशंका जताई जा रही है। सेना और बीएसफ ने घुसपैठ की चार कोशिशों को नाकाम भी किया है।
उत्तरी कश्मीर में सक्रिय आतंकियों में पाकिस्तानी आतंकियों की संख्या ज्यादा है जबकि दक्षिणी कश्मीर में स्थानीय आतंकी अधिक सक्रिय हैं। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद के सेना और सुरक्षा बलों को पत्थरबाजों से निपटने में ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ी। इस कारण पाकिस्तानी आतंकियों ने सुरक्षित ठिकाना बना लिया।
मुठभेड़ के दौरान हो रही है पत्थरबाजी
आतंकियों को स्थानीय लोगों की मदद ने सुरक्षा बलों के समक्ष नई समस्याएं पैदा की हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुलगाम मुठभेड़ के बाद अब सेना को दोतरफा हमले झेलने पड़ रहे हैं।
तलाशी और मुठभेड़ में एक ओर से आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग होती है और दूसरी तरफ उपद्रवियों की पत्थरबाजी शुरू हो जाती है। नए खतरों से निपटने के लिए सेना और सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच बनाने का निर्णय लिया है।