15 घरों में आई दरारें, परिवारों ने स्कूल में ली पनाह

Rahul Yadav Updated Wed, 08 Apr 2015 11:31 PM IST
landslide danger still in doda
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दो दिन से बारिश का सिलसिला भले ही थम गया हो, लेकिन भूस्खलन के डर से गांवों से लोगों के विस्थापन का सिलसिला और तेज हो गया है। लोगों को डर है कि पूरी तरह गीले हो चुके कच्चे मकानों में तेज धूप से दरारें आएंगी और वह ढह जाएंगे। जान बचाने के लिए घरों को छोड़ना ही उनके लिए एकमात्र विकल्प रह गया है।
गांव जटार में भूस्खलन से 15 घरों में दरारें आ गई हैं। लोगों ने गांव के ही सरकारी मिडिल स्कूल में शरण ली है। गांव कुठयारी के छह परिवारों ने टेंटों को बसेरा बना लिया है। पंचायत सदस्य रंजीत कुमार का कहना है कि पूरे क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हैं।

अब तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी उनकी खबर लेने नहीं पहुंचा है। जगह जगह पस्सियां गिर रही हैं। तकरीबन सौ कनाल कृषि भूमि धंस चुकी है। अधिकतर लोग गरीब हैं। उनकी जमीन भूस्खलन में छिन गई है। उनके लिए तो मरने जैसी नौबत है।

जिला मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर दूर मलवास गुज्जर बस्ती जो कि चिनाब दरिया के किनारे हैं। वहां भी भारी भूस्खलन हुआ है। मुसीबत के मारे ग्रामीणों ने खेतों में टेंट लगाए हैं। यहां के 45 परिवारों का यही मानना है कि जब से बगलिहार पनबिजली परियोजना के लिए चिनाब दरिया में झील बनाई गई है, तब से उनके लिए हर वक्त मौत के मुंह के पास खड़े रहने की नौबत है।
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गांव के नीचे की जमीन ख‌िसक रही है

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