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जम्मू-कश्मीर: भू-मालिकों को मिलेगी अब जमीन की पासबुक, 26 जनवरी से मिलेंगे कागजात
Sun, 12 Dec 2021 04:39 PM IST
विमल शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Sun, 12 Dec 2021 04:39 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में सरकार अब भूमि मालिकों को पासबुक जारी करेगी। इसमें राजस्व रिकॉर्ड के साथ संबंधित व्यक्ति की जमीन का पूरा ब्यौरा होगा। जमीन पासबुक में यह भी दर्ज होगा कि किस जमीन पर किसका कब्जा है।
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जम्मू सचिवालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में सरकार अब भूमि मालिकों को पासबुक जारी करेगी। इसमें राजस्व रिकॉर्ड के साथ संबंधित व्यक्ति की जमीन का पूरा ब्यौरा होगा। जमीन पासबुक में यह भी दर्ज होगा कि किस जमीन पर किसका कब्जा है। जमीन पासबुक के लिए 15 जनवरी, 2022 तक परीक्षण प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
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आगामी 26 जनवरी को भूमि पासबुक मिलना शुरू हो जाएगी। शुरूआत जम्मू और श्रीनगर जिलों से होगी, 15 अगस्त तक सभी जिलों में पासबुक जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। शनिवार को राजस्व विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने अधिकारियों को इस बारे निर्देश जारी किए।
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जम्मू और श्रीनगर जिलों में भूमि पासबुक जारी करने की प्रक्रिया को 31 मार्च 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा, जबकि अन्य सभी जिलों के लिए 15 अगस्त 2022 तक का समय निर्धारित किया गया है। बैठक में बताया गया कि डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के तहत राजस्व विभाग ने प्रदेश में 7,75,70,009 दस्तावेज, 58,754 नक्शे व 760 जमाबंदी स्कैन कर ली हैं।
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इस रिकॉर्ड को ‘अपनी जमीन अपनी निगरानी’ कार्यक्रम के तहत वेब पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। राजस्व विभाग अब वेबसाइट पर भूमि रिकॉर्ड, पंजीकरण और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) सत्यापन का रिकॉर्ड उपलब्ध करवाएगा। सभी प्रक्रियाओं की समय सीमा की निगरानी के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों में ई -ऑफिस मॉडल अपनाया जाएगा।
मोबाइल नंबर, आधार से जुड़ेगा राजस्व रिकॉर्ड
राजस्व विभाग का रिकॉर्ड अब जमीन के मालिक के मोबाइल नंबर व आधार नंबर से जोड़ा जाएगा। इस तरह से जमीन से जुड़े लेन-देन को लेकर गड़बड़ी को रोका जाएगा। राजस्व मामले की हर प्रक्रिया शुरू होने पर भूमि मालिक को एसएमएस भेजकर सूचित किया जाएगा।
जीआईएस मैप से विवादों का निपटारा
सर्वे ऑफ विलेज एंड मैपिंग विद इंप्रोवाइज्ड टेक्नोलाजी इन विलेज एरिया (एसवीएएमआईटीवीए) के तहत विभाग राजस्व संबंधी विवादों और अदालती मामलों को कम करने के लिए सर्वे इंफ्रास्ट्र्क्चर और जीआईएस मैप तैयार कर रहा है। इस प्रक्रिया में संवेदीकरण अभियान, आन ग्राउंड सीमाएं बनाना, एसओपी निर्धारित करना और सर्वेक्षण पूरा होने के बाद संपत्ति कार्ड बनाना शामिल है।
पहले वाणिज्यिक क्षेत्रों से हटेगा अतिक्रमण
राजस्व और सरकारी विभागों की भूमि पर हुए अतिक्रमण को प्राथमिकता से हटाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों को कहा गया है कि 1990 से लेकर 2020 तक दशक वार अतिक्रमण का डेटा उपलब्ध करवाया जाए। चिह्नित अतिक्रमण में सबसे पहले वाणिज्यिक क्षेत्रों में हुआ अतिक्रमण हटाया जाएगा। कब्जा छुड़ाकर बाकायदा तारबंदी की जाएगी।