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Jammu News: हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की... से गूंजा बाबा कैलख मंदिर
Thu, 15 Jun 2023 02:31 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 15 Jun 2023 02:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। बाबा कैलख मंदिर ठठर बन तालाब परिसर बुधवार को हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की... सहित कई भजनों से गूंजता रहा। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया, जिसमें भक्त कन्हैया के रंग में रंगे नजर आए।
जन्मोत्सव के उपरांत विधिवत कृष्ण पूजन के बाद मिठाई का वितरण किया गया। कथावाचक स्वामी ध्यानू भगत ने प्रभु भक्ति की महिमा बताते हुए कहा भगवान विष्णु राजा बलि को वामन अवतार में छलने आते हैं। वे राजा बलि से तीन पग जितनी भूमि मांग लेते हैं। राजा बलि के गुरु उनका साक्षात्कार ईश्वर से कराते हुए उन्हें संकल्प लेने से रोकते हैं। राजा बलि के आग्रह पर जब भगवान विष्णु वामन अवतार से अपने विराट स्वरूप में आकर दो ही पैर में संपूर्ण ब्रह्मांड को माप लेते हैं। राजा की परीक्षा लेते हुए पूछते हैं कि तीसरा पैर कहां रखूं अन्यथा नरक भेज दूं। राजा बलि ने अपने संकल्प की रक्षा करते हुए प्रभु भक्ति में भगवान से अपना तीसरा पैर उन पर रख उन्हें भक्त रूप में स्वीकार करने को कहा। राजा बलि के भक्त प्रेम के आगे स्वयं भगवान हार गए और राजा बलि के महल का द्वारपाल बन उन्हें स्वीकारा। बलि-वामन प्रसंग की संगीतमय प्रस्तुति से श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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दोमाना। बाबा कैलख मंदिर ठठर बन तालाब परिसर बुधवार को हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की... सहित कई भजनों से गूंजता रहा। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया, जिसमें भक्त कन्हैया के रंग में रंगे नजर आए।
जन्मोत्सव के उपरांत विधिवत कृष्ण पूजन के बाद मिठाई का वितरण किया गया। कथावाचक स्वामी ध्यानू भगत ने प्रभु भक्ति की महिमा बताते हुए कहा भगवान विष्णु राजा बलि को वामन अवतार में छलने आते हैं। वे राजा बलि से तीन पग जितनी भूमि मांग लेते हैं। राजा बलि के गुरु उनका साक्षात्कार ईश्वर से कराते हुए उन्हें संकल्प लेने से रोकते हैं। राजा बलि के आग्रह पर जब भगवान विष्णु वामन अवतार से अपने विराट स्वरूप में आकर दो ही पैर में संपूर्ण ब्रह्मांड को माप लेते हैं। राजा की परीक्षा लेते हुए पूछते हैं कि तीसरा पैर कहां रखूं अन्यथा नरक भेज दूं। राजा बलि ने अपने संकल्प की रक्षा करते हुए प्रभु भक्ति में भगवान से अपना तीसरा पैर उन पर रख उन्हें भक्त रूप में स्वीकार करने को कहा। राजा बलि के भक्त प्रेम के आगे स्वयं भगवान हार गए और राजा बलि के महल का द्वारपाल बन उन्हें स्वीकारा। बलि-वामन प्रसंग की संगीतमय प्रस्तुति से श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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