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भक्ति है समस्त सुखों की खान
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दोमाना। भक्ति समस्त सुखों की खान है। भक्ति का अर्थ जुड़ना है, जिसका मार्ग सत्संग से मिलता है। यह प्रवचन श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सरोज भारती ने दिया। उन्होंने बताया कि सत्य का अर्थ ईश्वर है। जब इंसान के पुण्य उदय होते हैं तब उसे संत का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जहां से आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त कर व्यक्ति प्रभु भक्ति की यात्रा शुरू करता है और अपने समस्त बुरे कर्मों को छोड़ कर परम गति को प्राप्त होता है।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से मिश्रीवाला में चार दिवसीय श्री हरि कथा जारी है। सोमवार को तीसरे दिन साध्वी सरोज भारती ने प्रभु भक्ति के संबंध में प्रवचन देकर संगत को निहाल किया है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता में प्रभु श्रीकृष्ण ने बताया कि ईश्वर का अंत: करण में दर्शन करना ही आध्यात्मिक ज्ञान कहलाता है। कुरुक्षेत्र में वह पहले अर्जुन को उपदेश देते हैं और उसके बाद दिव्य दृष्टि प्रदान कर भीतर में ही ईश्वर के प्रकाश रूप का दर्शन करवा देते हैं। कथा के दौरान साध्वी संदीप भारती, साध्वी सतिंदर भारती और दीप सहगल ने प्रभु के भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं, आरती के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर छतर सिंह मन्हास, स्वामी हरिदास आनंद, स्वामी सुचेता नंद, नारायण सिंह और विनोद शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से मिश्रीवाला में चार दिवसीय श्री हरि कथा जारी है। सोमवार को तीसरे दिन साध्वी सरोज भारती ने प्रभु भक्ति के संबंध में प्रवचन देकर संगत को निहाल किया है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता में प्रभु श्रीकृष्ण ने बताया कि ईश्वर का अंत: करण में दर्शन करना ही आध्यात्मिक ज्ञान कहलाता है। कुरुक्षेत्र में वह पहले अर्जुन को उपदेश देते हैं और उसके बाद दिव्य दृष्टि प्रदान कर भीतर में ही ईश्वर के प्रकाश रूप का दर्शन करवा देते हैं। कथा के दौरान साध्वी संदीप भारती, साध्वी सतिंदर भारती और दीप सहगल ने प्रभु के भजनों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। वहीं, आरती के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इस मौके पर छतर सिंह मन्हास, स्वामी हरिदास आनंद, स्वामी सुचेता नंद, नारायण सिंह और विनोद शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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