#TripleTalaaq सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कश्मीरी महिलाओं में बेहद खुशी का माहौल
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तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से घाटी की मुस्लिम महिलाओं में भी खुशी है। उनका मानना है कि इस फैसले ने महिलाओं का सम्मान लौटाया है। शादी को मजाक समझने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है। वकील, पत्रकार, गृहणी, स्वयंसेवी संगठन सभी ने इस फैसले का स्वागत किया है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा महजूर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह अच्छा फैसला है। इससे महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के मामले में जीत हुई है। तीन तलाक शरिया के नजरिये से सही है, लेकिन जो इंस्टेंट ट्रिपल तलाक है, उस पर प्रतिबंध लगाया गया है जो अच्छा फैसला है।
ज्यादातर इसी का इस्तेमाल कर औरतों के अधिकारों का हनन कर रहे थे। मुस्लिम पर्सनल लॉं बोर्ड को भी गौर करना चाहिए कि कहीं लोगों द्वारा इस्लामिक कानूनों का गलत इस्तेमाल कर अधिकारों को छीना तो नहीं जा रहा है। इस फैसले से महिलाओं को काफी लाभ मिलेगा।
'सबसे अधिक जरूरत शादी के रिश्ते को बचाए रखना है'
हाईकोर्ट की वकील अरशी जुहर के अनुसार वह तीन तलाक पर फैसले को सकारात्मक तरीके से देखती हैं। आज सबसे अधिक जरूरत शादी के रिश्ते को बचाए रखना है। आजकल एक फैशन सा बन गया है कि शौहर बड़ी ही आसानी से अपनी पत्नी को तलाक देकर छोड़ देता है।
आज के इस फैसले से ऐसे लोग जिन्होंने शादी को मजाक समझ रखा था काफी हतोत्साहित होंगे। केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों ने भी इसे गैर संवैधानिक ठहराया है। ये सभी देश ऐसे हैं जहां कानूनों में विकास देखने को मिला है और जहां शादी के बाद औरतों के हक की रक्षा की जाती है।
यह एक इस्लामिक मुद्दा है। अगर इस्लाम के नजरिये से भी देखें तो मोहम्मद साहब को भी तलाक नापसंद था। आज के दौर में परिवार मजबूत करने हैं, बेटियों के लिए मुस्तकबिल संवारना है तो ऐसी चीजें होनी चाहिएं।