कश्मीरी पड़ितों ने अल्पसंख्यक दर्जा और आरक्षण की मांग की
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कश्मीरी पंडितों ने मंगलवार को अल्पसंख्यक दर्जे और नौकरियों में आरक्षण के साथ ही दस विधानसभा सीटों पर आरक्षण और कश्मीर घाटी में अपने पुनर्वास के लिए एक समग्र बस्ती के निर्माण की मांग की।
जगती आवास समिति के अध्यक्ष एसएल पंडिता ने यहां संवाददाताओं से कहा कि समुदाय के लिए अल्पसंख्यक दर्जे और अलग अलग क्षेत्रों खासकर विधानसभा सीटों में आरक्षण के प्रावधान के साथ घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए एक समग्र बस्ती का निर्माण किया जाए।
उन्होंने कहा कि समुदाय को उचित राजनीतिक आरक्षण देने के लिए संसदीय सीटों में आरक्षण के अलावा कश्मीर के 10 जिलों की 10 विधानसभा सीटें कश्मीरी पंडितों के लिए आरक्षित की जाएं। पंडिता ने कहा कि हम कश्मीरी पंडित परिवारों के लिए मासिक नकदी सहायता में बढ़ोतरी की मांग करते हैं।
संबंधित अधिकारियों ने हाल में मामला अपने हाथ में लिया है और हमसे कहा है कि नकदी मदद राहत में बढ़ोतरी की घोषणा जल्द ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि जगती आवास समिति और सोन कश्मीर फ्रंट का एक प्रतिनिधिमंडल आज जम्मू राहत संगठन (एम) के राहत आयुक्त आर के पंडिता से मिला जिन्होंने नकदी मदद राहत में बढ़ोतरी का भरोसा दिलाया।
विस्थापित परिवारों को 50 लाख रुपए का मुआवजा मिले
पंडिता ने घाटी में कश्मीरी पंडितों से संबंधित भूमि और संपत्तियों को लगातार बेचे जाने पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, कि माइग्रेशन के पिछले 25 वर्षों के दौरान जो अतिक्रमण किया गया है उसे तुरंत रद्द किया जाए। सरकार उनके मूल मालिकों को उनकी संपत्ति वापस करवाए।
उन्होंने कहा, इस संबंध में कश्मीर प्रांत में उपायुक्तों को दिशा-निर्देश दिए जाएं कि वे प्रवासी कश्मीरी पंडितों के मदिंरों और श्राइन पर गलत तरीके से किए गए अवैध कब्जों को हटवाए।
विस्थापित कश्मीरी पंडित को पिछले 25 वर्षों खेती और संपत्ति के खाली पड़े रहने के कारण 2 लाख रुपये का सालाना नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने मुआवजेका दावा करते हुए कहा कि 25 सालों से कश्मीरी पंडितों को रहे नुकासन की भरपाई करने के लिए सरकार प्रत्येक विस्थापित परिवार को 50 लाख रुपए तक का मुआवजा दे।