कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को साजिशन दिया गया पलायन का नामः पनुन कश्मीर
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पनुन कश्मीर संगठन ने कहा है कि कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को एक साजिश के तहत पलायन और नस्लीय सफाए जैसे शब्दों तक सीमित कर दिया गया। निर्वासन के 30 वर्ष पूरे होने पर रूपनगर में आयोजित कार्यक्रम में पनुन कश्मीर पदाधिकारियों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इस दौरान अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने का पुरजोर स्वागत भी किया गया।
पनुन कश्मीर के संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि 19 जनवरी की तारीख कश्मीरी हिंदुओं के जीवन का सर्वनाश दिवस है। वर्ष 1990 में इसी दिन बर्बरता का सिलसिला शुरू हुआ था। इसी के बाद कश्मीर घाटी का शांति से नाता टूट गया।
डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं का एक हजार वर्ष के इतिहास में यह सातवां निर्वासन है। डॉ. अजय चरुंगू ने कहा कि कश्मीर में हिंदुओं का 19 जनवरी 1990 में नरसंहार शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि समूचे दक्षिण एशिया में हिंदुओं को बर्बरता का सामना करना पड़ा है। एडवोकेट टिटू गंजू ने कहा कि पनुन कश्मीर की ओर से जीनोसाइड एंड एट्रोसिटीज प्रीवेंशन बिल 2020 प्रस्तावित किया गया है।
डोगरों के रहेंगे आभारी
बिहारी लाल कौल ने कहा कि जम्मू के डोगरों के प्यार और करुणा के तमाम कश्मीरी आभारी रहेंगे। बेघर समुदाय को जम्मू में रहने को जगह और अपनापन दिया। उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी लोग दोनों समुदायों के बीच दरार डालने की कोशिश करते हैं लेकिन ऐसे तत्वों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।
विजन कश्मीर ने मनाया विस्थापन दिवस
विजन कश्मीर के सदस्यों ने विस्थापन दिवस मनाया। इस दौरान सदस्यों ने दो मिनट का मौन धारण किया। संस्था के कनवीनर सुनील फोतेदार ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि घाव आज भी ताजा हैं। समुदाय आज भी बुरे दौर से गुजर रहा है। रमेश सोपोरी ने कहा कि तीन दशक से उत्पीड़न हो रहा है। इस दौरान विजन कश्मीर ने उपराज्यपाल से अपील कर कहा कि वे कश्मीरी पंडितों के मामले में कमेटी का गठन करें जो उनके शिकायतों को कम करने के लिए काम करें।