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बुरहान की मौत से पहले ही तैयार था हिंसा का प्लान: महबूबा मुफ्ती

Mon, 09 Jan 2017 07:31 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Mon, 09 Jan 2017 07:31 PM IST
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KASHMIR UNREST WAS PLANNED SAYS MEHBOOBA
विधानसभा में महबूबा मुफ्ती का बयान - फोटो : संजय गुप्ता

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रियासत में अमन बहाली के लिए संवाद प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए पाकिस्तान और अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराया। विधानसभा में कश्मीर हिंसा पर चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए महबूबा ने कहा, कश्मीर हिंसा के लिए जहां पहले से ही षड़यंत्र तैयार कर लिया गया था, वहीं सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का न्योता ठुकराकर अलगाववादियों ने अमन बहाली की राह में अड़चनें पैदा करने का काम किया।

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मुख्यमंत्री ने कहा, घाटी का माहौल बिगाड़ने की साजिशें बुरहान वानी की मौत से पहले ही रची जा चुकी थीं। कश्मीरी पंडितों और पूर्व सैनिकों के लिए कालोनी के मामले पर साजिशें नाकाम हो गईं तो बुरहान वानी की मौत ने उन्हें माहौल बिगाड़ने का मौका दे दिया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमन का पैगाम लेकर लाहौर गए थे।
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उसके तुरंत बाद पठानकोट हमला हो गया। अब जोड़ियां में आतंकियों ने हमला कर दिया। पूरे देश की निगाहें अलगाववादियाें पर टिकी हुई थीं। सांस रोक कर हर कोई सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अलगाववादियाें की बातचीत के नतीजे का इंतजार कर रहा था। इसके बावजूद अलगाववादियों ने बातचीत के द्वार नहीं खोले। जबकि वे बातचीत कर मुद्दे के हल का सुझाव दे सकते थे।

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'हिंसा फैलाने के लिए योजनाबद्ध कोशिशें हुईं'

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महबूबा मुफ्ती - फोटो : Amar Ujala

कश्मीर हिंसा का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा, हिंसा फैलाने के लिए योजनाबद्ध कोशिशें हुईं। बुरहान की मौत के दूसरे ही दिन मस्जिदों में भड़काऊ नारे लगाए गए और लोगों को सीडी बांटीं गईं। हिंसा भड़काने के लिए मासूम बच्चाें का इस्तेमाल किया गया।

उपद्रव के दौरान सुरक्षा बलों के संयम पर उन्हाेंने कहा, सुरक्षा बलाें पर पेट्रोल बमों, पत्थरों और तेजधार हथियारों से हमले किए जाएं तो संयम बरतना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, यदि सेना को ज्यादा नुकसान का आभास हो तो वो भी संयम बरतती है।

हिंसा के दौरान घायलाें को अस्पताल जाने की अनुमति नहीं दी गई। गर्भवती महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया। उन्हाेंने कहा, हिंसा चाहे 2010 की हो या 2016 की, दोनों ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं। विपक्ष को अवाम के जख्मों पर मरहम के लिए सहयोग करना चाहिए।

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