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कारगिल युद्ध: शहीद युगल किशोर शर्मा की तरह देश सेवा करना चाहता है उनका भतीजा

Sat, 24 Jul 2021 10:31 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 24 Jul 2021 10:31 PM IST
सार

पाकिस्तान चाहे जितनी मर्जी नापाक हरकतें कर ले, वह भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए इलाके का हर नौजवान बलिदान देने को तैयार है।

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Kargil War: Martyr yugal Kishore Sharma's nephew wants to serve the country
कारगिल युद्ध

विस्तार

कारगिल युद्ध में शहीद हुए युगल किशोर शर्मा के भतीजे उत्कर्ष शर्मा बड़े होकर चाचा की तरह देश की सेवा करना चाहते हैं। उन्होंने अपने चाचा के बलिदान को नमन करते हुए सेना में बतौर अधिकारी नौकरी पाने की इच्छा प्रकट की। उत्कर्ष ने कहा कि वह स्नातक होकर सीडीएस की परीक्षा पास करेंगे, और सेना में नौकरी पाएंगे। उत्कर्ष ने बताया कि वे लोग नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र के सामने रहते हैं।
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यहां हर दिन पाक के गोले गिरते रहते थे। अभी चार महीनों से ही शांति हुई है। जब गोले गिरते थे, तब भी उन्हें डर नहीं लगता था। पाकिस्तान चाहे जितनी मर्जी नापाक हरकतें कर ले, वह भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए इलाके का हर नौजवान बलिदान देने को तैयार है। ठीक वैसे, जैसे उनके चाचा ने दिया। अपने सबसे छोटे भाई के बलिदान को याद करते हुए भर आई आंखों को साफ करते हुए केवल कुमार कहते हैं आज उनके पास जो कुछ है, वह युगल किशोर की ही देन है।
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उसने अपना बलिदान देकर उन्हें शहीद परिवार का दर्जा दिलाया। उसके बलिदान के बाद सेना एवं सरकार की तरफ से उनकी हर प्रकार से सहायता की गई। केवल कुमार बताते हैं कि युगल किशोर बचपन से ही सेना में भर्ती होने का इच्छा रखता था। पढ़ने में तेज होने के कारण वह जल्दी प्रमोशन पाकर हवलदार बन गया था। जब कारगिल की जंग शुरू हुई तो उन्हें युगल की एक चिट्ठी से पता चला था कि उनकी यूनिट कारगिल भेजी गई है।
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वहां 1 जुलाई 1999 को वह पाकिस्तानियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया। 4 जुलाई को उसका पार्थिव शरीर घर आया था।  उधर, युगल किशोर के बचपन से जवान तक के साथी अश्वनी कुमार भी अपने दोस्त के बलिदान पर गर्व करते हुए कहते हैं कि युगल बचपन से ही सेना में जाकर देश के लिए कुछ करना चाहता था। उसने कारगिल की पहाड़ियों पर देश के लिए बलिदान देते हुए अपनी इच्छा पूरी की।

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युगल किशोर का नहीं बना कोई स्मारक
शहीद युगल किशोर शर्मा की याद में सरकारी तौर पर न कोई आयोजन होता है, और न जिले में कहीं कोई स्मारक बनाया गया है। जलास गांव के मुख्य चौराहे पर उनके बलिदान के एक वर्ष बाद पानी की एक टंकी जरूर बनवाई गई थी, जिस पर आज केवल शहीद के नाम की संगमरमर की एक प्लेट ही लगी हुई है। टंकी में पानी की बूंद भी नहीं है। शहीद के प्रति सरकारी एवं प्रशासनिक बेरुखी से गांव के लोगों में भी रोष है।

ग्रामीणों का कहना है कि कारगिल में शहीद होने वालों के नाम पर उनके गांव के बाहर बड़े बड़े द्वारों का निर्माण कराया गया है। शहीदों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। कई स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर रखे गए हैं। लेकिन, पुंछ में कारगिल के शहीदों को वह सम्मान नहीं मिल सका। शहीद के नाम पर कोई स्मारक नहीं बनाया, कहीं कोई प्रतिमा नहीं लगाई। अब तो शहीद के बलिदान दिवस पर किसी प्रकार का कोई आयोजन तक नहीं किया जाता।
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