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कारगिल युद्ध: परिवार के लिए प्रेरणा स्रोत बने कारगिल शहीद इश्ताक, छह माह बाद सेना में भर्ती हुआ भाई

Sat, 24 Jul 2021 08:36 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 24 Jul 2021 08:36 PM IST
सार

भतीजी रजिया और भतीजा मुस्तकीन भी सेना में भर्ती होकर करना चाहते हैं देश सेवा।

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Kargil war: Kargil martyr Ishtaq became a source of inspiration for the family, brother joined the army after six months
कारगिल विजय दिवस

विस्तार

कारगिल युद्ध के शहीद इश्ताक अहमद के परिवार में देश भक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। इश्ताक अपने परिवार और अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी शहादत के छह माह बाद ही छोटे भाई सज्जाद अहमद ने सेना में भर्ती होकर बड़े भाई की शहादत को सलाम किया। सज्जाद अहमद इस समय 12 जैकलाई पठानकोट में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं।

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3 अप्रैल 1978 को जन्मे इश्ताक ने 9 जून 1999 में मात्र 20 वर्ष की आयु में शहादत हासिल की थी। 1996 में सेना में भर्ती हुए इश्ताक को 2 वर्ष और 9 महीने देश की सेवा करने का मौका मिला। इस दौरान उन्हें हाई अल्टीट्यूड मेडल और सियाचिन गलेशियर मेडल से भी सम्मानित किया गया था।   
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शाया बेगम और अब्दुल गनी के पांच बेटों में से इश्ताक की शहादत के बाद सज्जाद सेना में भर्ती हो चुके हैं। सबसे बड़े बेटे मुश्ताक अहमद सरकारी कर्मचारी हैं। दो अन्य अपना कारोबार करते हैं। मुश्ताक अहमद की बेटी रजिया भी सेना में जाना चाहती हैं। रजिया जम्मू यूनिवर्सिटी से एमए उर्दू कर रही हैं। 10वीं में पढ़ रहे रजिया के भाई मुस्तकीन मुश्ताक का भी कहना है कि वह भी सेना में जाकर देश सेवा करेंगे। उन्हें इसकी प्रेरणा अपने चाचा इश्ताक से मिली है।
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शहीद इश्ताकअहमद के मां-बाप शाया बेगम और अब्दुल गनी ने कहा कि हमें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। बेटे की शहादत के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें सब कुछ दिया। शहीद के नाम पर एक पेट्रोल पंप भी चल रहा है। देश सेवा के लिए अब छोटे बेटे को सेना में भेजा है।

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शहीद की मां शाया बेगम ने कहा कि उनके छोटे बेटे फारूक अहमद और आजाद अहमद भी सेना में जाना चाहते थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल पाया और अब वह अपना कारोबार करते हैं। पूरा परिवार संग्रामभाटा इलाके में रह रहा है। यहीं शहीद के नाम पर पेट्रोल पंप भी है। उनके बड़े बेटे मुश्ताक अहमद सरकारी कर्मचारी हैं।  उनकी ही बेटी रजिया कोसर भी सेना में जाने का शौक रखती हैं।

78 वर्षीय अब्दुल गनी कहते हैं कि उनके बेटे शहीद इश्ताक अहमद बचपन से ही बहादुर थे। बचपन से ही उनका सपना सेना में जाने का था, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से पूरा किया। सेना में उनका तीसरा साल चल रहा था। उनकी शादी के बारे में सोच रहे थे कि शहादत की खबर आ गई।

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